सिकंदराराऊ । हाथरस रोड स्थित गांव लश्करगंज में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास राम बल्लभाचार्य ने व्यास पीठ से कहा कि महाभारत संसार में रहना, गीता निष्काम कर्म करना, रामायण मर्यादित जीवन जीना और श्रीमद्भागवत संसार से विदा होना सिखाती है। उन्होंने कहा कि मृत्यु के समय स्थान से अधिक व्यक्ति की स्थिति और मन की अवस्था महत्वपूर्ण होती है। कथा में कश्यप जी और दिति के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि दिति ने सायंकाल कश्यप जी के मना करने के बावजूद पुत्र प्राप्ति की इच्छा जताई, जिसके परिणामस्वरूप हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु का जन्म हुआ। इनके उद्धार के लिए भगवान ने वराह और नरसिंह अवतार धारण किए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को कर्मों के फल भोगना पड़ता है। इसलिए गलत कर्म करने से पूर्व सोचना चाहिए। ईश्वर का नाम जपने से ही मनुष्य उद्धार हो सका है। इस दौरान हिंदी प्रोत्साहन समिति के अध्यक्ष कवि देवेंद्र दीक्षित शूल ने व्यासपीठ का पूजन कर आशीष प्राप्त किया। इस मौके पर जयप्रकाश उपाध्याय, शकुंतला देवी, अशोक कुमार शर्मा ,कुमुद रानी, ब्रजेश पाठक, भानूप्रकाश शर्मा,हरिशंकर शर्मा, विनोद शर्मा ,पंकज पचौरी ,जय कुमार शर्मा , ब्रह्मजीत सिंह यादव,शैलेंद्र उपाध्याय,मुरारी लाल,सौरभ उपाध्याय आदि मौजूद रहे।












