प्रधानों ने की पंचायतों में प्रशासक नियुक्त न करने की मांग: प्रधानों को ही दें जिम्मा

हाथरस। ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूर्ण होने एवं 1 साल के लिए वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही संचालन व्यवस्था सौंपे जाने की मांग को लेकर आज अखिल भारतीय पंचायत परिषद द्वारा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सदर ब्लाक के खंड विकास अधिकारी को सौंपा गया है और लोकतांत्रिक निरंतरता एवं सुशासन के दृष्टिगत त्रिस्तरीय पंचायतों के कार्यकाल विस्तार की मांग की है।
अखिल भारतीय पंचायत परिषद के पदाधिकारी व ग्राम प्रधानों ने ज्ञापन में कहा है कि प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल क्रमशः 26 मई, 12 जुलाई एवं 20 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण में विलम्ब,समर्तित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन लम्बित होना तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया का अपूर्ण रहना आदि सभी तथ्य स्पष्ट करते हैं कि बिना विधिक औपचारिकताओं की पूर्ति के चुनाव कराना न तो न्यायसंगत होगा और न ही टिकाऊ । वर्तमान परिस्थितियों का गहन विश्लेषण यह संकेत करता है कि निर्धारित समयावधि में पंचायत चुनाव सम्पन्न होना सम्भव नहीं है ।
ऐसी स्थिति में यदि निर्वाचित पंचायतों में यदि प्रशासकों की नियुक्ति की जाती है तो यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत होगा। विगत वर्षों में जब पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किये गये थे, तब उनके स्थानों पर पारदर्शिता की कमी, जवाबदेही का अभाव तथा वित्तीय अनियमितताओं की शिकयतें सामने आई थी, जिससे ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक विश्वास कमजोर हुआ। इसके विपरीत ग्राम प्रधान एवं अन्य पंचायत प्रतिनिधि सीधे जनता द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधि होते हैं। वे अपने क्षेत्र की जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं तथा स्थानीय आवश्यकताओं और समस्याओं की गहरी समझ रखते हैं। इस कारण वे अपने दायित्वों का निर्वहन अधिक सतर्कता पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ करते हैं । देश के अन्य राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तराखण्ड में भी समान परिस्थितियों में निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही कार्यभार सौंपकर लोकतांत्रिक निरंतरता बनाए रखने का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। यह विषय प्रदेश के लाखों पंचायत प्रतिनिधियों एवं करोड़ों ग्रामीण नागरिकों की अपेक्षाओं से जुड़ा हुआ है ।

परिषद ने कहा है कि स्पष्ट है कि वर्तमान परिस्थितियों में सबसे अधिक तर्कसंगत जनहितकारी एवं व्यावहारिक समाधान यही है कि त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया जाये जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो। लोकतांत्रिक व्यवस्था की निरंतरता बनी रहे। ग्रामीण स्तर पर विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहे । अखिल भारतीय पंचायत परिषद ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उक्त तथ्यों एवं पूर्ण अनुभवों के दृष्टिगत सकारात्मक निर्णय लेते हुए निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को ही प्रशासक बनाए जाने हेतु शासनादेश जारी करें।

ज्ञापन देने वालों में अखिल भारतीय पंचायत परिषद के जिलाध्यक्ष एवं प्रधान परसारा मनोज सिसोदिया एड.,मौ. रियाज कुम्हरई,धूल मुहम्मद गढ़ी पत्ती बनारसी, बृजभूषण अग्निहोत्री नगला मान, बनवारीलाल नगला अलिया,पिंकी तिपरस, नीतू देवी नगला अलिया, सुरमिल ऐंहन, अमित मीना रमनगला,श्यामबाबू प्रधान रतनगढी, तारावती सत्यवीर वाघऊ, प्रीती कुमारी, मनीश कुमार, शेखूपुर मदन, सलमान खान,पुष्पेन्द्र सिंह सिसौदिया प्रधान ग्राम पंचायत गढ़ी बलना, हरीशचद्र प्रधान, लाल सिंह प्रधान प्रतिनिधि, योगेंद्र सिंह प्रधान सहित तमाम प्रधान शामिल थे।

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

Leave a Comment