* संस्थापक कन्हैया वार्ष्णेय के आवास पर बैठक में मुख्यमंत्री को भेजा जायेगा: राजीव वार्ष्णेय की अध्यक्षता व राजेंद्र वार्ष्णेय के संचालन में जुटे शीर्ष व्यापारी नेता: 60 वर्ष पार कर चुके व्यापारियों के सामाजिक सुरक्षा अधिकार पर हुआ मंथन
हाथरस-5 सितम्बर।संयुक्त उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक बैठक संगठन के संस्थापक कन्हैया वार्ष्णेय के आवास पर संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के संस्थापक राजीव वार्ष्णेय ने की तथा कुशल संचालन जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र वार्ष्णेय द्वारा किया गया। बैठक में जनपद एवं प्रदेश भर के 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ व्यापारियों की दयनीय आर्थिक स्थिति, वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा के अभाव और सरकारी उपेक्षा पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। गहन विचार-विमर्श के उपरांत सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन को विस्तृत मांग-पत्र/ज्ञापन भेजने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।।
बैठक में पारित प्रमुख मांगें एवं बिंदुवार प्रस्तावों में 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले प्रत्येक पंजीकृत छोटे व खुदरा व्यापारी को न्यूनतम ₹15,000 प्रतिमाह की गारंटीड पेंशन अनिवार्य रूप से दी जाए। इसके अतिरिक्त, व्यापारी द्वारा जीवनभर जमा किए गए जीएसटी और आयकर के अनुपात में पेंशन स्लैब तय किए जाएं। 10 वर्ष तक नियमित करदाताओं को ₹15,000, 20 वर्ष तक ₹25,000 तथा 30 वर्ष से अधिक कर चुकाने वाले वरिष्ठ व्यापारियों को ₹36,000 प्रतिमाह तक पेंशन मिले।।
संस्थापक राजीव वार्ष्णेय एवं विपिन वार्ष्णेय ने कहा कि पेंशन व्यापारी पर कोई सरकारी एहसान या भीख नहीं, बल्कि जीवनभर ईमानदारी से दिए गए टैक्स के अनुपात में उसका संवैधानिक हक और स्वाभिमान है। इसके लिए सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार डालने की आवश्यकता नहीं है। व्यापारियों द्वारा भरे जाने वाले कुल जीएसटी के राजस्व में से मात्र 0.5 से 1 प्रतिशत का अंश सीधे व्यापारी सामाजिक सुरक्षा एवं पेंशन फंड में सुरक्षित कर यह योजना सुगमता से संचालित की जा सकती है। जब व्यापारी खुद अपने टैक्स से खजाना भरता है, तो उसी के टैक्स से उसके बुढ़ापे की लाठी क्यों नहीं बन सकती है। 10 लाख का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा एवं पारिवारिक सुरक्षा कवच
दुकान की गद्दी पर लगातार 12 से 14 घंटे अनवरत बैठे रहने के कारण 60 से 70 वर्ष की उम्र में अधिकांश व्यापारी घुटनों के दर्द, सर्वाइकल, रीढ़ की हड्डी की बीमारियों, उच्च रक्तचाप व हृदय रोग से गंभीर रूप से पीड़ित हो जाते हैं और दुकान जाने में असमर्थ हो जाते हैं।संस्थापक कन्हैया वार्ष्णेय एवं जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह चौहान ने कहा कि 70 वर्ष का बुजुर्ग व्यापारी जब लाचार होकर दुकान बंद करने को मजबूर होता है, तो उसका परिवार गहरे आर्थिक संकट में घिर जाता है। पेंशन के साथ-साथ प्रत्येक पंजीकृत वरिष्ठ व्यापारी और उसके परिवार को ₹10 लाख तक का पूर्णतः कैशलेस स्वास्थ्य सुरक्षा कवर (आयुष्मान योजना की तर्ज पर) अनिवार्य रूप से मिलना चाहिए ताकि उसे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े। साथ ही आकस्मिक मृत्यु अथवा दिव्यांगता पर व्यापारी दुर्घटना सहायता राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख की जाए।।
जनप्रतिनिधियों और सरकारी तंत्र के समान समानता का विधिक अधिकार
एक जनप्रतिनिधि मात्र 5 वर्ष विधायक या सांसद रहकर आजीवन पेंशन, रेल-हवाई यात्रा और निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्राप्त करता है। दूसरी ओर, देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहलाने वाला व्यापारी 40 वर्ष तक दुकान चलाकर 70 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का राजस्व सरकार को देता है, फिर भी वृद्धावस्था में वह पाई-पाई और दवाइयों के लिए बेटों या दूसरों पर निर्भर रहने को विवश हो जाता है। जिला महामंत्री रविंद्र सिंह एवं जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र वार्ष्णेय ने कहा कि जब सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पर सुरक्षा मिल सकती है और 5 साल के नेताओं को आजीवन पेंशन की गारंटी है, तो 40 साल देश की सेवा करने वाले व्यापारी के साथ यह दोहरा मापदंड क्यों? व्यापारी समाज अब जागरूक हो चुका है। आने वाले चुनावों में जो भी राजनीतिक दल व्यापारी पेंशन व सामाजिक सुरक्षा को अपने घोषणापत्र में प्रमुखता से शामिल कर ठोस नीति बनाएगा, प्रदेश का समूचा व्यापारी समाज एकजुट होकर उसी का समर्थन करेगा। हमारे वोटों का मोल तभी है जब हमारे बुढ़ापे की सुरक्षा की गारंटी हो।
18 से 60 वर्ष तक अनवरत सेवा का सम्मान और आर्थिक गरिमा देश का व्यापारी वर्ग 18 वर्ष की आयु से लेकर 60 वर्ष की आयु तक बिना किसी रविवार, राष्ट्रीय पर्व या त्योहार की छुट्टी लिए प्रतिदिन सुबह से देर रात तक कठिन परिश्रम करता है।जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज वार्ष्णेय, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष अंकित वार्ष्णेय एवं जिला उपाध्यक्ष वकील वार्ष्णेय ने संयुक्त रूप से कहा कि व्यापारी समाज ने हमेशा मंदी, नोटबंदी, कोरोना महामारी और हर संकट में सरकार व समाज का साथ दिया है। जीवन के 40 अनमोल वर्ष खजाना भरने में लगाने वाले व्यापारी को टैक्स स्लैब आधारित पेंशन मिलना ही वास्तविक न्याय है। जब व्यापारी को पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिलेगी, तो व्यापार करना देश में लाचारी नहीं बल्कि एक गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक बनेगा। युवा पीढ़ी भी गर्व से पुश्तैनी व्यापार की ओर आकर्षित होगी।
चुनावी घोषणापत्रों पर कानूनी जवाबदेही कानून बने चुनावी मौसम में राजनीतिक दल व्यापारी वर्ग को रिझाने के लिए लोकलुभावन घोषणाएं करते हैं, किंतु सत्ता में आने के बाद उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। संगठन ने मांग की कि ऐसा सख्त विधिक कानून बने जिसके तहत घोषणापत्र में व्यापारी पेंशन का वादा करने वाले दल के लिए सत्ता में आने के 1 वर्ष के भीतर उसे लागू करना अनिवार्य हो। यदि तय समय में घोषणा लागू नहीं होती, तो व्यापारी संगठनों को उस दल और सरकार के विरुद्ध सीधे अदालत में वाद दायर करने तथा कानूनी कार्यवाही करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त हो।
बैठक के समापन पर सर्वसम्मति से तय किया गया कि शीघ्र ही संगठन का एक वृहद प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को यह विस्तृत मांग-पत्र सौंपेगा। यदि शासन स्तर से व्यापारियों के इस मौलिक अधिकार पर त्वरित संज्ञान नहीं लिया गया, तो संगठन तहसील स्तर से लेकर प्रदेशव्यापी हस्ताक्षर अभियान और शांतिपूर्ण जनजागरण आंदोलन प्रारंभ करेगा।।
बैठक में संस्थापक राजीव वार्ष्णेय, संस्थापक विपिन वार्ष्णेय, संस्थापक कन्हैया वार्ष्णेय, जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह चौहान, जिला महामंत्री रविंद्र सिंह, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र वार्ष्णेय, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज वार्ष्णेय, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष अंकित वार्ष्णेय, जिला उपाध्यक्ष वकील वार्ष्णेय सहित संयुक्त उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के तमाम वरिष्ठ व्यापारी एवं पदाधिकारीगण मौजूद थे।












