परीक्षित की ब्रह्मास्त्र से रक्षा की थी श्रीकृष्ण ने


हाथरस। भागवत साक्षात श्री कृष्ण का स्वरूप हैं। जिस प्रकार उत्तरा के गर्भ में उन्होंने परीक्षित की रक्षा की थी। उसी प्रकार भगवान हर भक्त की उसके दुश्मन, लोभ, मोह, क्रोध व अहंकार जैसे शत्रुओं से सुरक्षा करतें हैं।
उक्त उद्गार पं.श्रीहरि सुरेशाचार्य जी महाराज वृंदावन ने रुई मण्डी स्थित मंदिर श्री ठा.कन्हैयालाल जी पर बतौर कथा व्यास व्यक्त किये। इससे पूर्व 18 मई को बिहारीजी मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई और कथा में श्री भागवत जी का महात्म्य बताया। कथा में परीक्षित के जन्म की कथा में बताया कि अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ में पल रहे परीक्षित पर ब्रह्मास्त्र चलाया और श्री कृष्ण ने रक्षा की। गर्भ में जिसने भगवान का परीक्षण किया इसलिए नाम पड़ा परीक्षित पड़ा। शुकदेव जी ने 7 दिन में भागवत सुनी और मृत्यु से पहले ही मुक्ति प्रदान कर दी।
इस अवसर पर मंदिर सेवायत पं. चेतन महाराज, अध्यक्ष राजकुमार वर्मा कोठीवाल, पवन सिंह पौरुष, कन्हैया अग्रवाल, बौ. देवेश कौशिक, गगन गुप्ता, आलोक वार्ष्णेय, पूर्व सभासद पवन गुप्ता, बांकेबिहारी वर्मा, सौरभ बंसल, गौरव बंसल, दीपक वर्मा, सुभाष वर्मा, संजीव वर्मा अदि भक्तगण उपस्थित थे।

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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