कुल शरीफ में तबर्रूख बांटा और मांगी मुल्क सलामती की दुआ अलाउद्दीन हसन शाह बिलाली की दरगाह पर उर्स के तीसरे दिन मनाया कुल शरीफ

उर्स में कब्‍बाली पेश करते कब्‍बाल

सासनी-15 जनवरी। कस्बा में चल रहे सुल्तानुल आरफीन हजरत ख्वाजा सूफी हाफिज अलाउद्दीन हसन शाह बिलाली के तीसवें सालाना उर्स मुबारक के मौके पर कुल शरीफ के तहत दूसरे शहरों से आए अकीकतमंदों ने बाबा की दरगाह पर तवर्रूख(प्रसाद चढाया) पेश किया और मशहूर कव्वालों ने बाबा की शान में कब्बालियां पेश कर मुल्क के सलामती की दुआ मांगी।।
कुल शरीफ के बाद रात को ईशा की नमाज के बाद महफिल ए समां का प्रोग्राम किया गया। जिसमें देश के मशहूर कव्वालों ने शिरकत फरमाकर बाबा के नाम अपने कलाम और कव्वालियां पेश की।अमरोहा से तशरीफ लाए इस्तखार कव्वाल ने कव्वाली पेश करते हुए अपना कलाम पढ़ा-कह दो यह परिंदों से अदब से उड़ा करें यह कूचा ए जाना है कुछ अर्श ए बरी नहीं। इसके बाद अलीगढ़ से तशरीफ लाए शमीम अनवर कव्वाल ने सुनाया-क्या बताऊं तुम्हें क्या मेरा पीर है मैं सुहागन हूं मेरा पिया पीर है। इसके अलावा बाबा की शान में कव्वाली पेश करने वाले मशहूर कव्वालों में से तशरीफ लाने वाले असीम कव्वाल अलीगढ़, आसिफ कव्वाल, अकरम कव्वाल अछनेरा, सलमान घासिमपुर,जावेद कव्वाल अलीगढ़ और उस्मान जलाल सासनी ने भी बाबा शाह बिलाली की शान में कव्वालियां और कलाम पेश करके श्रोताओं का दिल जीत लिया। जहां सैकड़ों मुरीदों ने शिरकत की और गद्दी नशीन डा. इरशाद अली हसन बिलाली ने मुल्क और कौम के लिए अमन चैन की दुआ की।। सज्जादा गद्दीनशीन हाफिज डा. इरशाद अली हसन शाह बिलाली की सरपरस्ती में चल रहे उर्स कार्यक्रम में तमाम जायरीन और अकीकतमंद मौजूद थे।

 

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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