
सिकन्द्राराऊ-15 जनवरी। कस्बा एवं ग्रामीण अंचल में आज मकर संक्रांति का पर्व दान पुण्य कर श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इससे माहौल भक्तिमय हो गया। सुबह से ही श्रद्धालुओ द्वारा स्नान कर भगवान सूर्य नारायण की उपासना की और सुख समृद्धि की कामना की गई। मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान हुए। मंदिरों में भगवान जी को विशेष पोशाक धारण कराई गई। श्रद्धालु महिलाओं ने सुबह पूजा अर्चना कर खिचड़ी, गजक,मूंगफली , वस्त्र आदि का दान किया ।। कस्बा एवं ग्रामीण अंचल में जगह जगह खिचड़ी का वितरण किया गया । मंदिरों में भगवान जी के आलौकिक श्रृंगार किए गए । दर्शन करने को मंदिरों में भक्तो की भारी भीड़ उमड़ी । मकर संक्रांति के पावन पर्व पर जगह जगह पतंग उड़ाई गई । युवाओं एवं बच्चो में पतंग बाजी को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। आसमान में चारों ओर सुबह से ही पतंग नजर आ रही थी । श्रद्धालुओ ने जगह जगह जरूरतमंदो को कंबल वितरित कर पुण्य लाभ कमाया ।।
मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य नारायण मकर राशि में प्रवेश करते है। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करने को संक्रांति कहते हैं। वर्ष में 12 संक्रांतियां होती हैं। इनमें मेष, तुला, कर्क और मकर संक्रांति प्रमुख हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हुए सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होने लगता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं।।
शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व सभी जातकों को चाहे वह स्त्री हो अथवा पुरुष सूर्योदय से पूर्व अवश्य ही अपनी शय्या का त्याग कर के स्नान अवश्य ही करना चाहिए। इस दिन पितरों के लिए तर्पण करने का विधान है। पितरों का स्मरण करते हुए तिलयुक्त जल देने से वह प्रसन्न रहते हैं। तिल युक्त जल पितरों को देने अग्नि में तिल से हवन, इन्हें खाने व खिलाने व दान करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। गुड़ एवं कच्चे चावल बहते हुए जल में प्रवाहित करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन खिचड़ी, तिल, गुड़ और पके हुए चावल में गुड़ और दूध मिलाकर खाने से भी भगवान सूर्यदेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। गुड़ एवं कच्चे चावल बहते हुए जल में प्रवाहित करना बहुत शुभ माना जाता है।









