
सिकंदराराऊ । सुप्रीम कोर्ट द्वारा देशभर के प्राइमरी शिक्षकों के लिए आगामी 2 वर्षों के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य किए जाने के आदेश से शिक्षकों में भारी चिंता और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस फैसले से विशेष रूप से उन शिक्षकों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा । जिनकी सेवानिवृत्ति में केवल 10 से 12 वर्ष का समय शेष है।
देशभर में लगभग 1,87,000 प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। उम्र के इस पड़ाव पर पुनः प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना और उसे पास करना अत्यंत कठिन है । जिससे हजारों परिवारों के सामने आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उक्त बाते पूर्व एमएलसी डॉ राकेश सिंह राना ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि यह नियम शिक्षकों पर जबरन थोपा जा रहा है। करियर के अंतिम चरण में कार्यरत शिक्षकों के लिए इस प्रकार की परीक्षा पास करना व्यावहारिक नहीं है, और इससे उनके परिवारों का जीवन यापन प्रभावित होगा। उन्होंने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस विषय में तत्काल हस्तक्षेप किया जाए तथा केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर नया कानून बनाए। जिससे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक लग सके और अनुभवी शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रह सके। उन्होंने यह भी कहा कि अनुभवी शिक्षक देश की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके सम्मान व भविष्य की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है।











