अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा में साहित्य, सद्भाव और भाईचारे की दिखी अनूठी मिसाल

   

हाथरस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा ने गंगा-जमुनी तहज़ीब, सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता, आपसी प्रेम एवं भाईचारे का सशक्त संदेश देते हुए हाथरस की साहित्यिक परंपरा को नई ऊंचाई प्रदान की। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर एवं कवि विनीत आशना ने की तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में उप जिलाधिकारी सदर राजबहादुर सिंह उपस्थित थे। स्वागत कार्यक्रम का संचालन ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने किया।।
उक्त भव्य आयोजन जनपद में सर्वाधिक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित करने वाली संस्था ब्रज कला केंद्र के तत्वावधान में संपन्न हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि उप जिलाधिकारी सदर राजबहादुर सिंह द्वारा मां शारदा के चित्र पर पीत वस्त्र अर्पित कर एवं माल्यार्पण कर नमन करने से हुआ। इसके उपरांत दीप प्रज्वलन किया गया तथा मोमबत्ती जलाकर शमा रोशन करने की परंपरा का निर्वहन गजेंद्र सिंह चाहर, सुरेशचंद्र अग्रवाल, अनिल वार्ष्णेय, मुकेश शर्मा, कुलदीप चौधरी एवं कार्यक्रम संयोजक चंद्रगुप्त विक्रमादित्य द्वारा किया गया।।

सर्वप्रथम सभी आमंत्रित कवियों, कवयित्रियों एवं शायर-शायराओं का पीत वस्त्र ओढ़ाकर एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान ब्रज कला केंद्र के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। इसके पश्चात जनपद में साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने हेतु विशिष्ट अतिथि उप जिलाधिकारी सदर राजबहादुर सिंह को पगड़ी पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर, प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही तहसीलदार लक्ष्मीनारायण वाजपेई एवं नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहित सिंह को भी शॉल ओढ़ाकर एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।।
कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का शुभारंभ शायर शीवान कादरी की प्रभावशाली निजामत में हुआ। कार्यक्रम में देश भर से आए कवियों एवं शायरों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।निखत अमरोही ने पढ़ा —अपनी गुमनाम कहानी नहीं होने दूंगी,
खुद को मैं दूसरी रानी नहीं होने दूंगी।मध्यम सक्सैना ने कहा —दिन बनाने में रात लगती है,तुमको यह बात आसान लगती है।जिया नामा ने भाव व्यक्त किए —उसे लगता है हम मुश्किलों को झेल लेंगे,खुदा हम जैसों पर कितना भरोसा कर रहा है।फैज कुमार ने पढ़ा —पहले तो प्यार करने के काबिल बना दिया,फिर पत्थर सा दिल क्यों बना दिया।राशीद राहत ने कहा —यूँ तो कितने सारे लोग हैं दुनिया में,कुछ लोगों से मिलता हूं तो लगता है कितने प्यारे लोग हैं दुनिया में।नवीन नीर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा —जिन्हें तमीज नहीं धूप खर्च करने की,सुना है जेब में वह आफ़ताब रखते हैं।।
सम्मेलन में अमित शुक्ला ने कहा —प्यास क्या उसको तो पानी चाहिए,
शर्म तो दरिया को आनी चाहिए।जुनैद अख्तर ने पढ़ा-कातिल गवाह बनकर अदालत में आ गए,मुझ पर मेरे कत्ल का इल्जाम लगा गए। डा.नितिन मिश्रा ने भक्ति रस में कहा —लिखो श्रीराम दिल में है अगर भव पार की चाह,लिखे श्रीराम के पत्थर भी जल में तैर जाते हैं।कार्यक्रम की निजामत कर रहे शीवान कादरी ने कहा —देखने वाले भी पड़ जाए परेशानी में,खुद को इतना भी परेशान न रखा जाए।।
विशिष्ट अतिथि उप जिलाधिकारी सदर राजबहादुर सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा —यूँ ही मेरा चुप रहना बेहतर है,कुछ बोलेगा तो अकेला रह जाऊंगा।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ शायर विनीत आशना ने कहा-इतनी ही सुस्त है अगर रफ्तार तो मत आइये,आने को भी चाहिए इतवार तो मत आइये।। कवियों और शायरों की उत्कृष्ट रचनाओं को श्रोताओं ने अत्यंत शालीनता एवं गंभीरता से सुना। हाथरस की सरजमीं को रस और साहित्य की भूमि बताते हुए साहित्य प्रेमियों ने आयोजन की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।कार्यक्रम संयोजक चंद्रगुप्त विक्रमादित्य की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की विशिष्ट अतिथियों, कवियों, शायरों एवं साहित्य प्रेमियों ने सराहना करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। अंत में कार्यक्रम संयोजक चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं जनसमूह के प्रति आभार व्यक्त किया। पूरे कार्यक्रम में शहर के सबसे वरिष्ठ साहित्यकार ब्रज कला केंद्र के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव आशु कवि अनिल बौहरे का सानिध्य रहा।।

कार्यक्रम में कानूनगो शिव कुमार गौतम, अभिषेक कुलश्रेष्ठ, ध्रुव कुशवाहा, सुरेंद्र शर्मा, बीना गुप्ता, एड., पं. ऋषि कुमार कौशिक, इंदिरा जायसवाल, रूबी, डिंपल, प्रियांशी, रूपम कुशवाहा, श्वेता, माधवी, कृष्णा गुप्ता, आमना बेगम, हरिशंकर वर्मा, जितेंद्र गौतम एड., विकास चौधरी, प्रमोद गोस्वामी एड., प्रेम सिंह यादव एड., शशांक पचौरी एड., जमुना प्रसाद शर्मा एड., अनिल पाठक एड., विजय सिंह प्रेमी, अनिल गुप्ता, काजल चौधरी, उदल सिंह, अजय चौधरी, मोहम्मद तौसीफ, कपिल नरूला, संतोष उपाध्याय, विष्णु कुमार, प्रशांत कुमार, बाबा देवी सिंह निडर, सुखप्रीत सिंह, अनूप गुप्ता, जीवनलाल शर्मा, डॉ. सुनीता उपाध्याय, आर.के. शर्मा, चमनेस राजपूत, शिवकुमार, बृजेश वशिष्ठ, संजय भारद्वाज, ओमप्रकाश गुप्ता, एड., ए.डी. शर्मा, डॉ. रामपाल सिंह, अंकुर दीक्षित, देवकीनंदन शर्मा, नीलिमा सिसौदिया, योगेश वार्ष्णेय, मोहित वार्ष्णेय, श्यामबाबू चिंतन, नारायण शर्मा, अभिषेक खंगार, वीरेंद्र शर्मा, चांद कुरैशी, हिरदेश कुमार, अनिल बघेल, राकेश अग्रवाल, सुरेशचंद शर्मा, नवीन कुमार शर्मा, योगेश वार्ष्णेय, चंद्रप्रकाश, बालकिशन शर्मा, पंकज शर्मा, मुस्ताक अहमद, मुस्लिम इंतजामिया कमेटी के सदर राहत कुरैशी, विवेक प्रेमी, शैलेंद्र शर्मा, रोहित मिश्रा, योगेश गुप्ता सहित सैकड़ों साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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