भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं ने भक्तों को किया भाव-विभोर

हाथरस। श्री कृष्ण गौशाला सेवा समिति के तत्वावधान में श्री कृष्ण गौशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस कथा व्यास डाॅ. गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी मनु महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक बाल लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान का अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए ही नहीं, बल्कि भक्तों को आनंद और भक्ति का मार्ग दिखाने के लिए भी होता है।
कथा व्यास ने श्रीकृष्ण के पूतना वध, शकटासुर वध, तृणावर्त वध तथा माखन चोरी लीला का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान अपनी बाल्यावस्था में भी असुरों का संहार कर धर्म की स्थापना करते हैं। पूतना जैसी राक्षसी, जो भगवान को विष पिलाने आई थी, उसे भी प्रभु ने मातृत्व का पद प्रदान कर दिया। इससे स्पष्ट होता है कि भगवान की शरण में आने वाला कोई भी जीव उनके अनुग्रह से वंचित नहीं रहता।
कथा में यशोदा मैया द्वारा श्रीकृष्ण को ऊखल से बाँधने की दामोदर लीला का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा व्यास ने कहा कि भगवान प्रेम के बंधन में बंध जाते हैं, उन्हें न ज्ञान बाँध सकता है और न ही वैभव, केवल निष्काम प्रेम ही उन्हें अपने वश में कर सकता है।
इसके पश्चात कालिया नाग दमन लीला का वर्णन करते हुए बताया गया कि जब यमुना का जल विषाक्त हो गया और समस्त ब्रजवासी संकट में पड़ गए, तब श्रीकृष्ण ने कालिया नाग का दमन कर यमुना को पुनः पवित्र बनाया। यह लीला हमें सिखाती है कि भगवान अपने भक्तों के सभी संकटों का निवारण करते हैं।। मनु महाराज ने इन्द्र मान भंग, गोवर्धन लीला व प्रभु के 56 भोग मनोरथ का बहुत ही मार्मिक व भावपूर्ण विष्लेषण किया।कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजनों पर भाव-विभोर होकर नृत्य किया तथा नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की, गोवर्धन गिरधारी रे हम आये शरण तिहारी रे के जयघोष से पूरा पंडाल गुंजायमान हो उठा।
अंत में कथा व्यास मनु महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ केवल मनोरंजन नहीं हैं, बल्कि उनमें गहन आध्यात्मिक संदेश छिपा है। जो श्रद्धापूर्वक इन लीलाओं का श्रवण एवं मनन करता है, उसके जीवन में भक्ति, प्रेम और सदाचार का विकास होता है।आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ पंचम दिवस की कथा का समापन हुआ।
इस अवसर पर अरुण गर्ग, राकेश बंसल हींग वाले, प्रदीप राजगढ़िया, श्याम अग्रवाल, दीपेश अग्रवाल सर्राफ, बालगोविंद अग्रवाल, श्याम शर्मा राशन वाले, आनंद गोयल आदि का कथा आयोजन व व्यवस्था में विशेष सहयोग रहा।

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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