
हाथरस श्री वेद भगवान सनातन धर्मसभा के अध्यक्ष डा. जितेंद्र स्वरुप शर्मा फौजी ने जानकारी देते हुए बताया है कि विप्रकुल शिरोमणि श्री भगवान परशुराम जी का जन्मोत्सव अक्षय तृतीया 19 अप्रैल रविवार को मनाई जाएगी, क्योंकि तृतीया तिथि इस दिन उदय तिथि में सुबह रहेगी।
वेद भगवान सनातन धर्मसभा के अध्यक्ष डा. जितेंद्र स्वरुप शर्मा फौजी ने कहा है कि तृतीया तिथि 19 अप्रैल सुबह 10.29 से 20 अप्रैल सुबह 7.27 तक रहेगी। क्योंकि पूजा और दान के लिए उदया तिथि सुबह की तिथि को और मध्यान काल दोपहर तक महत्वपूर्ण है। पूजा और खरीदारी के लिए शुभ चैघड़िया मुहूर्त सुबह (चर लाभ अमृत) 10.49 शुभ है से 12.20 दोपहर (शुभ) 01.58 से 03.35 शाम (चर लाभ अमृत) 06.49 शाम-10.57 रात्रि। 20 अप्रैल को तृतीया। प्रातः मात्र 7.27 तक रहेगी। अतः शास्त्रोक्त पूजा के शुभ समय के अनुसार भी अक्षय तृतीया 19 अप्रैल रविवार को ही मनाया जाना उचित है।
उन्होंने कहा है कि अक्षय का अर्थ है जो कभी क्षय, नष्ट ना हो। इस दिन कोई भी कार्य किए जाने से अक्षय रहता है। इस दिन किए गए दान, पुण्य और जप का फल अनंत काल तक बना रहता है। यह दिन अबूझ मुहूर्त वर्ष के चार सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त में से एक है, जिसमें विवाह, गृह प्रवेश और नए व्यवसाय शुरू करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन ही भगवान विष्णु के अवतार परशुराम जी का जन्म हुआ था। इसे सतयुग का अंत और त्रेता युग का प्रारंभ माना जाता है और गंगा मैया का धरती पर अवतरण हुआ था। इस दिन सत्तू, जल से भरा कलश, अनाज, वस्त्र, और फल का दान करना महा पुण्यकारी माना जाता है। जैन तीर्थंकर ऋषभनाथ ने अपनी 1 वर्ष की तपस्या के बाद गन्ने के रस से उपवास तोड़ा था। इसलिए वह 11-12 महीने बाद भोजन ग्रहण करते हैं, जिसे वर्षितप कहते हैं।












