शहर के गौशाला रोड पर संचालित मां सुमित्रा रसोई एवं लाला कपूरचंद निशुल्क जल सेवा के 13 को हो रहे 4 वर्श पूर्ण

माँ सुमित्रा सेवा ट्रस्ट द्वारा संचालित माँ सुमित्रा रसोई गौशाला रोड मानव सेवा में मील का पत्थर स्थापित करते कर रही है। नर सेवा नारायण सेवा, मां सुमित्रा रसोई व लाला कपूरचंद अग्रवाल जल सेवा ने परमात्मा के आशीर्वाद व आप लोगों के प्रेम और सहयोग से अपने सफलतम 4 वर्ष पूर्ण किए हैं।
मां सुमित्रा रसोई की नींव 14 सितंबर 2021 को 5 बुजुर्ग माताओं के कर कमलों द्वारा रखी गई थी। उनका आशीर्वाद इस प्रकार फलीभूत हुआ कि 13 अप्रैल सन 2022 को माँ सुमित्रा रसोई व लाला कपूरचंद्र अग्रवाल जल सेवा का शुभारंभ हुआ। इस रसोई का निर्माण उनके सुपुत्र निरंजनलाल अग्रवाल डब्बू भाई द्वारा अपनी स्वर्गीय माताजी श्रीमती सुमित्रा देवी जी के नाम पर तथा प्याऊ का निर्माण पिता स्वर्गीय श्री कपूरचंद अग्रवाल जी के नाम पर हैं। उन दोनों का पूरा जीवन हमेशा सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित रहा।
लाला कपूर चंद्र अग्रवाल जी का जीवन शुरू से ही ‘सादा जीवन उच्च विचार’ की विचारधारा से प्रेरित था। वह बहुत साधारण जीवन जीते थे, लेकिन उनके विचार हमेशा बहुत ही उच्च रहते थे। उनके पास अगर कोई भी व्यक्ति दुखी मन से आता था तो वह उसको इतना हौसला देते थे और इतनी खुशियां प्रदान करते थे कि वह मुस्कुराता हुआ ही वापस जाता था।
उनके जीवन का एक किस्सा है कि बैनीराम बाग में मंदिर के पुजारी पंडित दाऊदयाल जी (दउआ गुरु) उनके पास आते थे और उनसे कहते थे कि मुझे गाय, भैंसों के लिए चारा लेकर आना है तो वह तुरंत अपनी जेब में जो भी पैसे होते थे, वह उनको निकाल कर देते थे और अलग से 5 रूपये और देते थे कि आप आराम से रिक्शे में जाना और चारा रख कर ले आना। क्योंकि वह गठरी भारी होगी और आपको उठाकर लाने में दिक्कत होगी। इसी प्रकार के अनेक वाक्य उनके जीवन के हैं, जहां उन्हें कोई भी समाजसेवा का अवसर मिला तो उन्होंने बढ़-चढ़कर उसमें प्रयास किया।
इसी तरह माता सुमित्रा देवी जी का जीवन शुरू से ही आध्यात्मिकता और निस्वार्थ सेवा भाव से ओत-प्रोत था। वह संत महापुरुषों के जन्मदिन, बरसी भंडारे, हमेशा ऐसे कार्यक्रमों को करने के लिए उत्सुक रहती थी। खुद परिवार में बहुत गरीबी होने के बावजूद भी वह संतों की सेवा में कभी भी पीछे नहीं हटती थी। बहुत से संत महापुरुष जब भी उनके पास या घर में आते थे तो वह उनको खुद अपने हाथ से भोजन कराती थी और उनकी समस्त सेवा खुद करने का प्रयास ही करती थी। एक बार की बात है जब वह सत्संगों में जाया करती थीं तो एक बुजुर्ग महिला का घर उनके रास्ते में पड़ता था। उस बुजुर्ग महिला ने एक बार उनसे कहा कि आप मुझे दो रोटी सुबह और दो रोटी शाम को भेज दिया करें, क्योंकि मेरे यहां कोई है नहीं और मैं भोजन के लिए असमर्थ हूं। उस समय उनके घर में अपने बच्चों के लिए भी भोजन की व्यवस्था उचित रूप से नहीं थी, फिर भी उन्होंने प्रयास किया और रोज सुबह-शाम भोजन उनके यहां अवश्य भेजा। जब वह उनके घर भोजन भेजती थी तो वह बुजुर्ग महिला बहुत दुआएं देती थी व कहती थी कि आपके घर बहुत तरक्की हो, नौकर चाकर हो, आपके मकान बने, आपके घर के आगे गाड़ियां खड़ी हो। वह बुजुर्ग महिला पूरे दिन ध्यान में माला जपने में लगी रहती थी और कहती थी कि मैं जितना भी भजन, जितना भी ध्यान पूरे दिन प्रभु का कर रही हूं उसका सारा फल आपको ही लगेगा, उनकी दुआएं, उनके आशीर्वाद से आज इस प्रकार फले कि आज माताजी का पूरा परिवार बहुत ही सुखद जीवन जी रहा है।
वो हमेशा कहां करती थी कि अपने जीवन मे प्रयास करना कि कुछ कार्य समाज के लिए जरूर हो तो डब्बू जी के मन में यह भावना उठी कि क्यूं न अपने माता पिता के नाम से ही कोई सामाजिक कार्य किया जाए, तो पूरे परिवार ने सोचा कि ऐसी रसोई खोली जाए जिसमें बहुत कम रुपये के अंदर बहुत अच्छा व शुद्ध खाना लोगों को दिया जाए।
तभी माँ सुमित्रा रसोई का यह रूप सबके मन में आया और 13 अप्रैल 2022 को माँ सुमित्रा रसोई का भव्य शुभारम्भ हुआ।
मां सुमित्रा रसोई के 4 साल के अंतर्गत रसोई की आवश्यकता अनुसार आटा गूंदने की मशीन, लोई बनाने की मशीन, रोटी बनाने की मशीन, मसाला पीसने की मशीन, पावरोल जनरेटर, डीप फ्रीज़ बड़ा, सर्वाे स्टेबलाइजर, सोलर प्लांट आदि मशीनों को लगाया गया, जिससे कि रसोई का काम सुचारू रूप से चल सके।
गत वर्षों के अंतर्गत 13 अप्रैल सन 2023 को रसोई ने अपने प्रथम वार्षिकोत्सव पर 1.40 लाख लोगों को भोजन सेवा दी तथा दूसरे वर्ष रसोई ने प्रगति करते हुए 1.58 लाख लोगों को एवं तृतीय वर्ष 1.57 लाख लोगों को रसोई ने शुद्धता से भरपूर भोजन कराया तथा इस वर्ष रसोई ने 1.67 लाख लोगों को भोजन देकर स्वर्णिम इतिहास दर्ज कराया है और इन 4 सालों में रसोई ने लगभग 6.17 लाख लोगों को भोजन की सेवा दी है। माँ सुमित्रा रसोई हाथरस में पहली ऐसी संस्था है जिसके द्वारा इन चार वर्ष में 6.17 लाख लोगों को भोजन सेवा देकर पुण्य लाभ अर्जित किया गया है। ये प्रभु की कृपा और आप लोगों का आशीर्वाद ही है जिसके कारण रसोई अपने कार्य पथ पर प्रगति कर रही है।
इस साल भी रसोई पर 90 से अधिक कार्यक्रम हुए जैसे कि जन्मदिन, शादी की सालगिरह, पुण्यतिथि इत्यादि इन कार्यक्रम पर प्रयास किया गया कि लोगों को समय समय पर कुछ व्यंजन भी खिलाये जा सके, जैसे पनीर की सब्जी, पुलाव, हलुआ, मेवा की खीर आदि। यदि आप लोग कोई भी व्यक्ति रसोई पर कोई भी कार्यक्रम करना चाहते हंै तो वह 9412062575 पर अपनी बुकिंग करा सकते हैं। माँ सुमित्र रसोई द्वारा गत वर्ष एक नई पुस्तक का श्री महंत गुरू लोचनदास साहिब जी मुख्य आचार्य मन्दिर श्री तुलसी साहिब द्वारा विमोचन कराया गया था जिसके द्वारा रसोई की पूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सकती है। माँ सुमित्रा रसोई अपने सफलतापूर्ण 4 वर्ष के लिए आप सभी का भी तहेदिल से धन्यवाद अदा करती है और यही कामना करती है कि आप सभी का जीवन मंगलमय व खुशहाल रहे।
माँ सुमित्रा रसोई के संचालक श्री निरंजनलाल अग्रवाल (डब्बू भाई) एवं श्रीमती बबली अग्रवाल ने वहाँ पर आए सभी लोगों का उनके प्रेम और सहयोग के लिए तहे दिल से धन्यवाद किया है और कहा है कि हम यही उम्मीद करते है कि आपका प्रेम व सहयोग हमें आगे भी ऐसे ही मिलता रहेगा। यदि आप हमको रसोई की प्रगति हेतु कोई सुझाव देना चाहते हैं तो वह आप हमें जरूर दें, जिससे रसोई आगे और प्रगति कर सके।












