श्रद्धा और उल्लास के साथ की होलिका की पूजा, महिलाओं ने सुख-समृद्धि के लिए की विशेष पूजा

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होली का त्योहार आज जहां पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है वहीं फाल्गुन पूर्णिमा के शुभ अवसर पर शाम शुभ मुहूर्त में होलिका दहन का आयोजन किया जायेगा। इस दौरान भारी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और परिवार की खुशहाली की कामना की।
शाम होते ही मोहल्लों और चैराहों पर सजी होलिका पूजन के लिए शाम तक महिलाओं की भीड लगी रही। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने होलिका की परिक्रमा की और जल, अक्षत, रोली, फूल व नई फसल (जौ की बालियां) अर्पित कीं। पूजा के दौरान महिलाओं ने होली माता के मंगल गीत गाए। महिलाओं ने अपने बच्चों के स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए भी विशेष प्रार्थना की। महिलाओं ने गोबर से बने बड़कुले, फल और मिठाइयों का भोग लगाया। अग्नि प्रज्वलित होने से पूर्व महिलाओं ने सात बार परिक्रमा कर सुख-शांति का आशीर्वाद मांगा। पूजा के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और प्रसाद वितरित किया। आचार्यों के मतानुसार अनुसार, होलिका दहन की तारीख को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम बना हुआ है, क्योंकि पूर्णिमा तिथि 2 और 3 मार्च दोनों दिन पड़ रही है। पंचांग के अनुसार 2 मार्च की शाम 5 बजकर 18 मिनट के बाद पूर्णिमा शुरू हो जाती है। इसी दौरान भद्रा भी लग जाती है, जो पूरी रात रहती है। ऐसे में शास्त्रों में कहा गया है कि भद्रा के शुभ हिस्से यानी पुच्छ काल में ही दहन करना चाहिए। इसलिए कई विद्वान 2 मार्च की मध्यरात्रि को दहन करना उचित बता रहे हैं। यही कारण है कि इस साल होलिका दहन खास माना जा रहा है। वहीं 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होने के कारण इस दिन रंग खेलने से परहेज किया जाएगा। होलिका दहन 2 मार्च की रात को होगा, लेकिन रंगभरी होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। ग्रहण और सूतक के चलते 3 मार्च को धार्मिक नियमों का पालन किया जाएगा। इसलिए इस बार होली का उत्सव दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखाई दे रहा है। लोग पहले दहन करेंगे, फिर ग्रहण के बाद अगले दिन रंगों का त्योहार मनाएंगे।
sunil sharma
Author: sunil sharma

REPORTER SASNI

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