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सिकंदराराऊ। कोतवाली हसायन क्षेत्र के गांव कानऊ में बुधवार को बारहवफात के जुलूस की अनुमति होने के बावजूद गांव के कुछ लोगों ने प्रस्तावित मार्ग से जुलूस नहीं निकलने दिया। जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। आयोजकों में आक्रोश पनप गया।
बताया जाता है कि बुधवार को बारहवफात का पर्व होने के चलते गांव कानऊ में जुलूस निकाला जाता है। जुलूस निकाले के लिए आयोजको द्वारा प्रशासन से विधिवत अनुमति ली गई थी। अनुमति पत्र में जुलूस का समय सुबह 8:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक निर्धारित था । जिसमें लगभग 300 से 500 लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई थी। प्रशासन द्वारा जारी अनुमति के मुताबिक, जुलूस नूरी मस्जिद, गांव कानऊ से शुरू होकर पोखर, तेलियों का मोहल्ला, छोटी दरगाह, बाईपास होते हुए बड़ी दरगाह (बंबा) तक जाकर वापस नूरी मस्जिद पर समाप्त होना था। अनुमति में निर्धारित मार्ग से किसी भी स्थिति में विचलन न करने समेत कई शर्तें शामिल थीं। आयोजकों ने आरोप लगाया कि अनुमति होने के बावजूद गांव के कुछ लोगों ने उन्हें प्रस्तावित मार्ग से जुलूस नहीं निकालने दिया। उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद उन्हें अनुमति के अनुसार जुलूस निकालने में अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। अनुमति पत्र में आयोजकों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था स्वयं करने, स्वयंसेवक नियुक्त करने, भीड़ को नियंत्रित रखने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने, धार्मिक या सुरक्षा व्यवस्था स्वयं करने ,धार्मिक या जातिगत नारेबाजी न करने, यातायात बाधित न करने और निर्धारित मार्ग का पालन करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही, किसी भी नई परंपरा की शुरुआत न करने की शर्त भी रखी गई थी। इस मामले में उपजिलाधिकारी धर्मेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि जुलूस किसी नई परंपरा के तहत नहीं, बल्कि परंपरागत मार्ग से ही निकाला गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोजकों की इच्छा पूरे गांव में घूमने की थी, उनका दावा था कि तीन साल पूर्व जुलूस पूरे गांव से होकर निकला था। हालांकि, प्रशासन द्वारा पिछले दो बार से निर्धारित मार्ग पर ही जुलूस निकालने पर सहमति बनी और शांति व्यवस्था के साथ जुलूस संपन्न हुआ।












