हाथरस। शासन द्घारा नगर पालिका परिषद में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन टेंडर प्रक्रिया में सामने आयीं गंभीर वित्तीय व प्रक्रियागत अनियमितताओं पर बड़ी कार्यवाही की गई है। शासन ने भाजपा की नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता चौधरी को वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों से तत्काल प्रभाव से वंचित कर दिया है। शासन द्वारा की गई कार्यवाही की जानकारी मिलते ही नगर पालिका के गलियारों व राजनीतिक हल्कों में भारी खलबली मच गई। उक्त कार्यवाही को लेकर आज पूरे दिन शहर में चर्चाओं का दौर चलता रहा।
शासन द्वारा डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के टेंडर में अनियमिताएं एवं प्रक्रियागत अनियमितताओं के मामले को गंभीरता से लेते हुए पालिका अध्यक्ष श्वेता चौधरी के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों को सीज कर दिया गया हैं । उक्त कार्यवाही नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद द्वारा जारी पत्र के अनुसार पालिका अध्यक्ष की शक्तियों और कर्तव्यों का निष्पादन अब जिलाधिकारी या उनके द्वारा नामित किसी ऐसे अधिकारी द्वारा किया जाएगा जो डिप्टी कलेक्टर रैंक से नीचे का ना हो।। शासन द्घारा यह कार्यवाही जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट, जांच समिति के निष्कर्ष और हाईकोर्ट में लंबित प्रकरण के परीक्षण के बाद की गई है। शासन के आदेश के अनुसार नगर पालिका परिषद हाथरस के अंतर्गत 35 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इस प्रक्रिया में गंभीर धांधली और राजस्व को क्षति पहुंचाने का आरोप लगाते हुए सभासद मनीष अग्रवाल और सुनील अग्निहोत्री ने जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।शिकायत की जांच के लिए उप जिलाधिकारी सदर और वरिष्ठ कोषाधिकारी की दो सदस्यीय संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया था। जांच समिति की रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर नियमों की अनदेखी पाए जाने की पुष्टि हुई। जांच समिति के निष्कर्षों के अनुसार टेंडर में कई गंभीर खामियां और नियम विरुद्ध कार्य पाए गए।। शिकायत में आरोप है कि वित्तीय मूल्यांकन की उक्त प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और 14 अगस्त 2024 को वित्तीय मूल्यांकन का तुलनात्मक चार्ट तैयार कर लिया गया।जबकि एल-1 फर्म की बैंक स्वीकृति 12 अगस्त 2024 तक ही मान्य थी। संबंधित फर्म ने डोर- टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए जरूरी कुछ अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए थे। इसके बावजूद उसे वित्तीय मूल्यांकन में सफल घोषित कर कार्यदेश जारी कर दिया गया और सितंबर 2024 के लिए करीब 22.45 लाख रुपए का भुगतान किया गया।
शासन द्वारा उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा-48 के तहत पालिका अध्यक्ष श्वेता चौधरी को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। हालांकि दिए गए अवसरों के बावजूद उन्होंने मुख्य वित्तीय व प्रशासनिक आरोपों पर कोई तथ्यात्मक प्रतिवाद या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।शासन ने माना कि अध्यक्ष द्वारा अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर अवचार किया गया है और नगर पालिका निधि को नुकसान पहुंचाया गया है। इसके बाद राज्यपाल की स्वीकृति से उ.प्र.नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा-48(2) के तहत कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर अवचार, पालिका निधि को नुकसान पहुंचाने और पालिका हित के प्रतिकूल कार्य करने का दोषी माना गया और इसी आधार पर यह दंडात्मक कार्यवाही की गई है।












