
सिकंदराराऊ । उत्तर प्रदेश में निबंधन (रजिस्ट्री) कार्यालयों के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों का आंदोलन शुक्रवार को दसवें दिन भी जारी रहा। तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन कर आंदोलनकारियों ने सरकार के प्रस्तावित निर्णय का विरोध जताते हुए निबंधन विभाग के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल वापस लेने की मांग की। इस दौरान धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि निबंधन विभाग आम जनता से सीधे जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण विभाग है । जमीन -जायदाद की रजिस्ट्री जैसे संवेदनशील कार्यों को निजी हाथों में सौंपना जनहित के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि निजीकरण लागू होने से आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा ।
वहीं अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों की आजीविका पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। आंदोलनकारियों ने सरकार से जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर तेज किया जाएगा। धरने की अध्यक्षता बार एसोसिएशन अध्यक्ष डी.के. चौहान (शोला) ने की, जबकि संचालन अधिवक्ता जय प्रकाश गुप्ता ने किया।
इस मौके पर बार एसोसिएशन सचिव राजेश बघेल, सिविल एसोसिएशन अध्यक्ष कुलदीप कुमार पुंढीर, जितेंद्र यादव, गौरी शंकर गुप्ता ,देवेंद्र दीक्षित शूल, मुरारी लाल शर्मा ,विपिन कुमार, सुरेश चंद्र,राधेश्याम यादव, महेश चंद्र अंजना, बृजेश यादव, प्रमोद बघेल ,महेंद्र सिंह यादव ,वीरपाल सिंह यादव ,अवनेश कुमार शर्मा, भरत सिंह कुशवाहा, श्रीकृष्ण, देवकांत कौशिक ,उदयवीर सिंह, सूरजपाल बघेल, राजेश यादव,
प्रियांशु दरगढ़ आदि मौजूद रहे।












