सावन उत्सव में लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रकृति व संस्कृति संरक्षण का संदेश

लखनऊ। अखिल भारतीय नागरिक परिषद के तत्वावधान में लखनऊ के दरोगा खेड़ा स्थित होटल पारस के सभागार में सावन उत्सव एवं हरियाली तीज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं ने लोकगीतों, कजरी, सावन गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के साथ प्रकृति और हरियाली के महत्व का संदेश दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान शिव को पुष्प अर्पित कर तथा रुद्राष्टक के पाठ के साथ किया गया। इसके बाद महिलाओं ने सावन और हरियाली तीज की पारंपरिक लोक संस्कृति को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया। प्रतिभागियों ने कजरी, सावन गीत एवं अन्य लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महिला आयोग की सदस्य रितु शाही उपस्थित रहीं, जबकि वरिष्ठ गायनेकोलॉजिस्ट मिथिलेश सिंह ने निर्णायक की भूमिका निभाई। उत्कृष्ट प्रस्तुतियां देने वाली प्रतिभागियों को आकर्षक पुरस्कार एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि रितु शाही ने कहा कि महिलाओं का सशक्त और आत्मनिर्भर होना आज के समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी सभ्यता और संस्कृति से जुड़े रहना चाहिए तथा आने वाली पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना चाहिए। यह तभी संभव है जब हम प्रकृति के करीब रहें, उसके नियमों को समझें और उसका सम्मान करें।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसम्मान, जागरूकता, शिक्षा और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता से भी जुड़ा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि किसी महिला को शोषण का सामना करना पड़ रहा है अथवा उसे किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता है, तो महिला आयोग उसके सहयोग के लिए सदैव तत्पर है और उसके दरवाजे महिलाओं के लिए हमेशा खुले हैं।

कार्यक्रम की आयोजक रीना त्रिपाठी ने कहा कि आज महिला सशक्तिकरण के दौर में महिलाओं के लिए हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और आत्मनिर्भरता के साथ-साथ अपनी सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करना भी हमारी जिम्मेदारी है। सावन और हरियाली तीज जैसे पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर भी हैं।

उन्होंने कहा कि यदि हम अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना चाहते हैं, तो ऐसे आयोजनों को निरंतर बढ़ावा देना होगा। प्रकृति का संरक्षण, भारतीय संस्कृति का सम्मान और महिला सशक्तिकरण—इन तीनों को साथ लेकर आगे बढ़ना ही स्वस्थ और समृद्ध समाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पारंपरिक परिधान, लोकगीतों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सावन की सुंदरता और हरियाली का संदेश दिया। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों एवं उपस्थित महिलाओं के सम्मान के साथ हुआ।

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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