हाथरस। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा आज जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को जनपद के शिक्षकों, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों की विभिन्न समस्याओं व अधिकारों की रक्षा हेतु महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा गया है। संघ ने लागू की जा रही ऑनलाइन डिजिटल उपस्थिति (डिजिटल अटेंडेंस) की प्रक्रिया का कड़ा विरोध करते हुए इसे तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की पुरजोर मांग की है।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा कहा गया है कि शासन के निर्णय का उल्लंघन है। संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 16 जुलाई 2024 को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा यह आधिकारिक निर्णय लिया गया था कि शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान हेतु गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने तक ऑनलाइन डिजिटल उपस्थिति अग्रिम आदेशों तक स्थगित रहेगी। ऐसे में जनपद स्तर पर इसे लागू करना शासन के निर्देशों के विपरीत है। पूरे उत्तर प्रदेश में जब तक शासन स्तर से कोई स्पष्ट, सर्वसम्मत और एकसमान नीति जारी नहीं होती, तब तक केवल हाथरस जनपद के शिक्षकों पर इसे अलग से थोपना पूर्णतः अलोकतांत्रिक और प्रशासनिक रूप से अन्यायपूर्ण है।

बेसिक शिक्षा से जुड़े शिक्षकों, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को आधारभूत ढांचागत सुविधाओं, नेटवर्क कनेक्टिविटी और अन्य व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बिना पूर्व तैयारियों और प्रदेशव्यापी नीति के इसे लागू करना अनुचित है।
संघ ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि 31 जुलाई के आदेश के क्रियान्वयन को जनहित व शिक्षक हित में तत्काल स्थगित किया जाए, ताकि विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल सुचारू बना रहे।। ज्ञापन देने वालो में संतोष कुमार शर्मा,योगेंद्र कुमार शर्मा ,वीरेंद्र कुमार सिंह, शशि कुलश्रेष्ठ ,गोविंद रावत, अरुण शर्मा ,शैलेंद्र चौहान, कृष्णकांत शर्मा, लाल बहादुर, कुलदीप सिंह, नरेश मीणा, सचिन शर्मा, अमित पचौरी, नितेश वार्ष्णेय, संतोष चौधरी, कन्हैया लाल शर्मा, गिरेंद्र सिंह, गौरव पचोरी, भगवान दास यादव, अमित शर्मा ,जीतू शर्मा, प्रभाकर शर्मा, राजेश कुमार, प्रेमवीर सिंह , बीपी गौतम प्रेमवीर सिंह,संजीव शर्मा,मणिभूषण शर्मा,सुनील कुमार आदि बड़ी संख्या शिक्षक विरोध स्वरूप उपस्थित थे।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा का कहना है कि हम किसी भी तकनीक के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जब तक प्रदेश सरकार शिक्षकों की समस्याओं और विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर कोई एकसमान नीति नहीं बनाती, तब तक हाथरस जनपद में जबरन डिजिटल उपस्थिति लागू करने के किसी भी प्रयास का डटकर विरोध किया जाएगा। शासन के निर्देशों का सम्मान करते हुए इस आदेश को तुरंत वापस लिया जाए।












