हाथरस। लगातार पाँचवें दिन भी मुझे बिना किसी लिखित आदेश, बिना किसी वैधानिक नोटिस और बिना किसी अपराध के मेरे ही घर में हाउस अरेस्ट रखा गया है। इतना ही नहीं, जिला कांग्रेस कमेटी के जिला महासचिव नवीन उपाध्याय को भी उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया है।
उक्त कहना है कांग्रेस जिलाध्यक्ष विवेक उपाध्याय का और उन्होंने कहा है कि आख़िर प्रशासन किसके इशारे पर काम कर रहा है? यदि हमने कोई अपराध किया है तो मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। लेकिन बिना किसी कानूनी आधार के बार-बार घरों में कैद करना कानून का शासन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने का प्रयास प्रतीत होता है।क्या अब जनता की आवाज़ उठाना अपराध है? क्या विपक्ष का दायित्व निभाना गुनाह है? यदि नहीं, तो प्रशासन बताए कि वह किस अधिकार से जनप्रतिनिधियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की आवाज़ को पुलिस के पहरे में रोक रहा है?।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष विवेक उपाध्याय ने कहा है कि सत्ता को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि बैरिकेड, पुलिस बल और हाउस अरेस्ट से जनआवाज़ को दबाया जा सकता है। इतिहास गवाह है कि लोकतंत्र को दबाने की हर कोशिश अंततः जनता की अदालत में बेनकाब हुई है।हम स्पष्ट कहना चाहते हैं कि कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहेगा। हाउस अरेस्ट, दबाव और दमन से हमारी आवाज़ न पहले रुकी है, न आगे रुकेगी।









