दुष्टों का संहार करने को प्रभु लेते अवतार – शीलेंद्र कृष्ण दीक्षित श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु

सिकंदराराऊ । भगवान का सच्चे मन से स्मरण करने से प्रभु सदैव भक्तो का साथ निभाते है । मनुष्य को सत्य के मार्ग पर चलने के साथ अपना मन भी शुद्ध रखना चाहिए । जब जब धर्म की हानि होती है । तब तब प्रभु अवतार लेकर भक्तो की रक्षा करते है और दुष्टों का संहार करते है । उक्त प्रवचन कथा व्यास पंडित शीलेंद्र कृष्ण दीक्षित ने कस्बा के मोहल्ला नौरंगाबाद पश्चिमी स्थित ओम बाबा मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन मंगलवार को दिए । उन्होंने श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कराते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा मानव कल्याण के साथ हमे सत्य के मार्ग पर चलने की सीख देती है । मनुष्य को सही मार्ग पर चलने के लिए कथाओं का समय समय पर अनुसरण करते रहना चाहिए । भगवान सदैव भक्तो का कल्याण करते है । हम सभी को सभी परिस्थितियों में भगवान का स्मरण करना चाहिए । कलयुग में भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से हर प्राणी को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही सभी जन्मों के पापों का नाश होता है। उन्होंने कथा में श्री राम व श्रीकृष्ण के जन्म एवं बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए धर्म, अर्थ , काम , मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला । यह भी बताया कि 24 लाख योनियों में भटकने की पश्चात मानव शरीर की प्राप्ति होती है। जब जब अत्याचार अन्याय बढ़ता है ,तब तब प्रभु अवतार होता है । प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब रावण का अत्याचार बढ़ा ,तब राम का जन्म हुआ । जब कंस ने सारी मर्यादाऐ तोड़ी तो प्रभु श्री कृष्ण का जन्म हुआ । कथावाचक ने कहा की भागवत कथा एक ऐसी कथा है जिससे ग्रहण करने मात्र से ही मन को शांति मिलती है । भागवत कथा सुनने से अहंकार का नाश होता है । कर्मयोगी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े आनंद और उल्लास के साथ बनाया गया ।
जैसे ही कथा पंडाल में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो श्रद्धालुओं में अलग की उत्साह नजर आया । श्रीकृष्ण के जयघोषों से क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया । कथा पंडाल में श्रद्धालुओं ने धूमधाम के साथ भगवान श्रीकृष्ण का नंदोत्सव भी मनाया । श्री कृष्ण का जन्म होते ही कथा पंडाल में श्रीकृष्ण के जयघोष गूंजने लगे । जिससे वातावरण सराबोर हो गया । कथा का रसपान करने को श्रद्धालुओं की भीड़ प्रति दिन बढ़ रही है ।

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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