दवाओं की कुछ दुकानें खुली, तो कुछ रही बंद

सिकंदराराऊ। ऑनलाइन दवा बिक्री, कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा भारी छूट और नकली दवाओं के विरोध में बुधवार को कस्बा में दवा व्यापारियों की हड़ताल का मिला-जुला असर देखने को मिला। जिसके कारण कुछ दवा दुकानें बंद रहीं जबकि कुछ खुली रहीं। जिससे मरीजों को बड़ी राहत मिली ।
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ कैमिस्ट एण्ड ड्रगिस्ट (AIOCD) और उत्तर प्रदेश की संस्था OCDUP के आह्वान पर बुधवार को बड़ी संख्या में दवा व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। दोपहर 12 बजे के बाद कुछ दवा कारोबारियों ने अपनी दुकानों को खोल लिया । दवाओं की दुकानें खुलने से मरीजों को बड़ी राहत मिली । जबकि सुबह से मरीज दवाओं के लिए खासे परेशान नजर आए। दवा व्यापारियों के राष्ट्रव्यापी आव्हान पर इस बंद का व्यापक असर देखने को मिला । जिससे पारंपरिक दवा व्यवसाय से जुड़े दुकानदारों ने एकजुटता दिखाई। दवा व्यापारियों का तर्क है कि ऑनलाइन माध्यम से दवाओं की अनियंत्रित बिक्री न केवल उनके पारंपरिक व्यवसाय को चौपट कर रही है, बल्कि इससे आम जनता के स्वास्थ्य को भी गंभीर खतरा है। व्यापारियों ने चिंता जताते हुए कहा कि ऑनलाइन दवाओं की होम डिलीवरी से बाजार में नकली और सब-स्टैंडर्ड (खराब गुणवत्ता वाली) दवाओं की खेप खपने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है। अपने वजूद को बचाने के लिए व्यापारियों को इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा है। इस बंदी को लेकर औषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) राजकुमार शर्मा ने बताया कि दवा व्यापारियों ने बाजार बंद रखने का निर्णय लिया है। हालांकि, इस फैसले को लेकर स्थानीय व्यापारियों में मिली-जुली राय भी देखने को मिली है । जहां कुछ इसके पक्ष में दिखे तो कुछ असमंजस में रहे।












