हाथरस। संयुक्त उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मण्डल द्घारा साइबर अपराध के झूठे / फर्जी मामले में फंसे निर्दोष नागरिकों, छात्रों, व्यापारियों एवं उद्योगपतियों की वित्तीय लायबिलिटी समाप्त कर राहत प्रदान करने हेतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित केंद्र सरकार के कई मंत्रियों व अधिकारियों को ज्ञापन भेजा गया है।। संयुक्त उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मण्डल द्घारा कहा गया है कि प्रदेश के लाखों व्यापारियों, उद्योगपतियों, एमएसएमई इकाईयों का प्रतिनिधित्व करता है। देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध एवं उससे जुड़े झूठे मामलों में फंस रहे निर्दोष नागरिकों की गम्भीर समस्या पर ध्यान देना आवश्यक है।पिछले तीन वर्षों में यूपीआई, इण्टरनेट बैंकिंग एवं ऑनलाइन लेनदेन के बढ़ने के साथ साइबर ठगी के मामले 400 प्रतिशत बढ़े हैं। एनसीआरबी के अनुसार 2023-24 में 12 लाख शिकायतें दर्ज हुई। चिन्ता का विषय यह है कि इन मामलों में ठगों के साथ-साथ हजारों बेकसूर, कम पढ़े-लिखे युवा, छात्र, व्यापारी एवं उद्योगपति भी अनजाने में जाल में फंस रहे हैं।।
व्यापार मंडल द्वारा कहा गया है कि साइबर फ्रॉड के कई ऐसे मामले हैं जिनके द्वारा युवा, व्यापारी आदि फंस रहे हैं। म्यूल एकाउण्ट – 200-500 रुपये के लालच में ग्रामीण युवाओं/छात्रों से बैंक खाता खुलवाकर साइबर ठग उसका दुरुपयोग करते हैं। पुलिस रिर्पोर्ट में खाताधारक को ही आरोपी बना देती है। केवाईसी फ्रॉड में व्यापारी के पैन/आधार का दुरुपयोग कर फर्जी फर्म बनाकर लेनदेन किया जाता है। जीएसटी नोटिस असली व्यापारी को जाता है।जॉब/लोन फ्रॉड, फर्जी नौकरी/ लोन के नाम पर प्रोसेसिंग फीस ली जाती है और पीड़ित का खाता फ्रॉड में इस्तैमाल होता है। ऑटो डेबिट फ्रॉड ओटीपी शेयर किये बिना भी खाते से पैसा निकल जाता है। बैंक ग्राहक की लापरवाही बताकर लायबिलिटी डाल देता है।
व्यापार मंडल वर्तमान व्यवस्था की खामियाँ बताते हुए कहा है कि पुलिस का रवैया साइबर थानों में स्टाफ / ट्रेनिंग की कमी। असली अपराधी न पकड़कर जिसका खाता इस्तैमाल हुआ उसे ही गिरफ्तार कर लिया जाता है। बैंक की नीति- आरबीआई की जीरो लायबिलिटी पॉलिसी कागजों में है। व्यवहार में बैंक तीन दिन बाद रिपोर्ट करने पर ग्राहक को ही दोषी मान लेता है। खाता फ्रीज में एक शिकायत पर पूरा खाता फ्रीज हो जाता है। व्यापारी का स्टॉक, वेतन, जीएसटी सब रुक जाता है। निर्दोष को जमानत केस लड़ने में 2-5 लाख रुपये खर्च हो जाते हैं। एमएसएमई व्यापारी बर्बाद हो जाता है।व्यापार एवं उद्योग पर प्रभाव- उत्तर प्रदेश में 90 लाख एमएसएमई इकाईयाँ हैं। रोज 200 व्यापारी साइबर फ्रॉड के शिकार हो रहे हैं। खाता फ्रीज होने से सप्लाई चेन टूटती है, मजदूरों का वेतन रुकता है, जीएसटी डिफॉल्ट होता है और धारणा खराब हो रही है।
संयुक्त उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मण्डल की माँगें है कि लायबिलिटी शील्ड कानून यदि खाताधारक ने खुद फ्राड न किया हो और पुलिस जाँच में सहयोग करे, तो उसकी वित्तीय लायबिलिटी शून्य की जाये। म्यूल एकाउण्ट एमनेस्टी स्कीम- पहली बार अनजाने में फंसे छात्रों /युवाओं को रिपोर्ट से मुक्त कर केवल चेतावनी देकर छोड़ें। खाता फ्रीज की सीमा में शिकायत पर पूरा खाता फ्रीज न करें। केवल विवादित राशि व 10 प्रतिशत तक होल्ड करें। साइबर बीमा अनिवार्य सभी जनधन / बचत खातों पर एक लाख रुपये तक का साइबर बीमा निःशुल्क जोड़ा जाये।
1930 हैल्पलाइन मजबूत- 24×7 हिन्दी में विशेषज्ञ बैठें, 30 मिनट में खाता ब्लॉक व राशि होल्ड की गारन्टी हो। जिला साइबर सहायता केन्द्र हर जिले में वकील टैक्नीकल एक्सपर्ट की टीम हो, जो रिपोर्ट बैंक पत्राचार में फ्री मदद करें।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में साइबर केस के लिए अलग कोर्ट हो, जिससे छः महीने में निर्दोष को क्लीन चिट मिले। पुलिस प्रशिक्षण – हर थाने में दो सब इंस्पैक्टर को साइबर इन्वेस्टीगेशन की टेनिंग।व्यापारी जागरुकता अभियान- व्यापार मण्डल के साथ मिलकर हर बाजार में कैम्प लगें।
प्रधानमंत्री का डिजिटल इण्डिया का सपना तभी साकार होगा, जब आम नागरिक डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित महसूस करे। आज निर्दोष फंस रहा है और अपराधी बच रहा है।
संयुक्त उत्तर प्रदेश व्यापार मण्डल अनुरोध करता है कि उपरोक्त मांगों पर तत्काल संज्ञान लेकर निर्दोष नागरिकों को राहत प्रदान करें। व्यापार मण्डल का प्रतिनिधि मण्डल मिलकर विस्तुत प्रस्तुति देने को तैयार है।। ज्ञापन देने वालों में राजीव वार्ष्णेय संस्थापक,राकेश बल्लभ वशिष्ठ वरिष्ठ अधिवक्ता मुख्य संरक्षक,कन्हैया वाष्णैय संस्थापक, राजेन्द्र वाष्र्णेय जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष,
कृष्णा शर्मा पहलवान युवा नगर अध्यक्ष आदि शामिल है।












