महंगी प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबों से अभिभावक परेशान

अनूप शर्मा
सिकंदराराऊ । निजी स्कूलों संचालकों की मनमानी एक बड़ा मुद्दा बन गई है। जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों और कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद, कई निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक एनसीईआरटी NCERT किताबें अब तक लागू नहीं हो पाई हैं। निजी स्कूल संचालकों ने जिलाधिकारी के आदेशों को ताक पर रख दिया है और अपनी तानाशाही जमकर चला रहे हैं। जिससे अभिभावक खासे परेशान हैं ।
बतादे कि शिक्षा सत्र शुरू होते ही अभिभावकों की जेब पर भारी बोझ पड़ने लगता है । बच्चों की महंगी किताबों से अभिभावकों की कमर टूट सी जाती है। निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य रूप से लागू कराने की पुरजोर मांग की गई ,ताकि अभिभावकों पर पड़ रहा आर्थिक बोझ कम हो सके और बच्चों को सस्ती व समान शिक्षा मिल पाए। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए
निजी स्कूलों को एनसीईआरटी किताबें लागू करने के सख्त निर्देश दिए थे। जिला और तहसील स्तर पर निजी स्कूल संचालकों की बैठकें भी हुईं और कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। हालांकि, कुछ स्कूल अभी भी जिलाधिकारी के आदेशों ताक पर रख अभिभावकों पर महंगी प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें, ड्रेस और स्टेशनरी थोप रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि कई स्कूल अब भी बच्चों को चिन्हित दुकानों से ही किताबें, कॉपियां और ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है कि एक बच्चे का कोर्स हजारों रुपये में पहुंच रहा है, जिससे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है। अब सवाल यह उठता है कि जब जिलाधिकारी निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने का आदेश दे चुके हैं। बाबजूद इसके निजी स्कूल संचालक अपनी मनमानी कर रहे हैं। तो प्रशासन द्वारा कार्रवाई कब की जाएगी। जनता का कहना है कि केवल आदेशों और बैठकों से नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई से ही बदलाव आएगा। यदि प्रशासन किसी एक बड़े स्कूल पर सख्त कार्रवाई करता है, तो बाकी स्कूल खुद ही नियमों का पालन करने लगेंगे। फिलहाल, अभिभावकों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।









