
हाथरस। शहर के बागला डिग्री कॉलेज के एक प्रोफेसर के बहुचर्चित मामले में आज न्यायालय द्वारा प्रोफेसर को यौन शोषण के आरोपों से दोष मुक्त कर दिया गया ।। बहुचर्चित यौन शोषण के एक मामले में प्रोफेसर रजनीश को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया है। एडीजे एफटीसी प्रथम महेंद्र कुमार श्रीवास्तव के न्यायालय ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी करने का आदेश दिया। यह मामला पिछले साल 6 मार्च को एक गुमनाम पत्र के साथ शुरू हुआ था। यह पत्र महिला आयोग को भेजा गया था, जिसमें शिकायतकर्ता ने खुद को छात्रा बताया था।पत्र में आरोप लगाया गया था कि बागला डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. रजनीश लंबे समय से उसका यौन शोषण कर रहे हैं। पत्र के साथ कुछ फोटो और वीडियो भी भेजे गए थे। इसी तरह की कुछ अन्य शिकायत भी आई थी। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर रजनीश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में न्यायालय में आरोपपत्र भी दाखिल किया था।।
आरोपी पक्ष के अधिवक्ता चौधरी वीरेंद्र सिंह ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि प्रोफेसर डॉ. रजनीश को केवल कुछ वीडियो के आधार पर आरोपी बनाया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान में एआई का दौर है, जिसमें किसी भी इलेक्ट्रॉनिक वीडियो को आसानी से फर्जी तरीके से तैयार किया जा सकता है। अभियोजन पक्ष ने प्रकरण को साबित करने के लिए 9 गवाह प्रस्तुत किए, जिनमें से 3 पीड़िताएं थीं। हालांकि, अभियोजन द्वारा केवल एक पीड़िता को ही मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराने के लिए प्रस्तुत किया गया। अन्य किसी पीड़िता को बयान दर्ज कराने के लिए पेश नहीं किया गया।।
कोर्ट में दी गई गवाहियों में किसी भी पीड़िता ने आरोपियों द्वारा किसी घटना को अंजाम दिए जाने के आरोपों की पुष्टि नहीं की, बल्कि उन्होंने साफ तौर पर इनकार किया है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि आरोपी को फंसाने के उद्देश्य से ही किसी ने फर्जी और मनगढ़ंत वीडियो तैयार कर भेजे हों। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अभियुक्त रजनीश को धारा-376, 376सी, 354 और धारा-67 आईटी एक्ट के आरोपों से दोषमुक्त किया गया।












