हिंदू संस्कृति तथा गौरवशाली इतिहास के विषय में विस्तार से की गई चर्चा

सिकन्दराराऊ। कस्बा के जी टी रोड स्थित क्रीड़ा स्थल में गुरुवार को विराट हिंदू सम्मेलन में हिंदू संस्कृति तथा गौरवशाली इतिहास के विषय में विस्तार से चर्चा की गई । आव्हान किया गया कि हमें अपनी गौरवशाली संस्कृति एवं संस्कार को अपनाना होगा। यह अत्यंत चिंताजनक है कि हिंदू धीरे-धीरे संख्या बल में काम होता जा रहा है। हमें इस पर भी गंभीरता से विचार करना होगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख प्रीतम, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राजेंद्र सक्सेना एवं संत सुनील कौशल जी महाराज ने भारत माता की आरती करके कराया। कार्यक्रम में बालिकाओं ने जहां राजस्थान का घूमर नृत्य प्रस्तुत किया । वहीं लड़कों ने देशभक्ति से ओत प्रेत कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। अपने संबोधन में ब्रह्माकुमारी बहन भावना दीदी ने कहा कि हमें अपने संस्कार और संस्कृति को अपनाना होगा। आत्मा परमात्मा से संवाद, संबंध स्थापित करना होगा ,तभी हमारी आत्मिक जागृति होगी। आत्मा अगर अमर तथा पवित्र है। हमें आत्मा की आवाज को गंदा नहीं करना चाहिए तथा इस पर चलकर अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए । प्रान्त प्रचार प्रमुख प्रीतम ने कहा कि आज पृरे विश्व मे हमारे देश का डंका बज रहा हैं।बड़े बड़े देश हमारी तरफ मदद के लिए देख रहे हैं। अपनी भाषा संस्कृति के बल पर हम विश्व मे छा रहे हैं।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संत सुनील कौशल जी महाराज ने कहा कि हम भाग्यवान है जो हमने भारत में जन्म लिया। हमारे देश में भगवान श्री राम की मर्यादा है तो भगवान श्री कृष्ण की कूटनीति है । स्वामी दयानंद भगवान बुद्ध तथा महावीर के शांति के संदेश भी हैं। वास्तव में देखा जाए तो सनातन हिंदू धर्म ही विश्व का सबसे बड़ा धर्म है । जिसका गौरवशाली इतिहास है। भगवान को हम जिस रूप में चाहते हैं अपने मन में याद करते हैं उसे रूप में हम उनके दर्शन कर लेते हैं । हमें अपने पूर्वजों पर गर्व करना चाहिए । हमारा एक देश हिंदुस्तान ,धर्म हिंदू, भाषा हिंदी, पर्वत हिन्दकोष और सागर हिंद महासागर है ।यह हमारे गर्व करने के लिए काफी है। सुनील महाराज ने कहा कि आज हमारी डेमोग्राफी कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। जब-जब हिंदू कमजोर हुआ है तब तब देश को अलग होने का दंश झेलना पड़ा है। बांग्लादेश में अब तक 46 हिंदुओं की हत्या कर दी गई है । वह वहां सुरक्षित नहीं है। अन्य समुदायों की संख्या बढ़ते ही आप उनके लिए लाचार हो जाते हैं। हम धर्मनिरपेक्ष नहीं हैं ,बल्कि भारत ही धर्म भूमि है। कार्यक्रम में भारी तादाद में महिला तथा पुरुष उपस्थित हुए । कार्यक्रम में वीर तथा वीरांगनाओं समेत अनेक पंथ के लोगों की झांकियां पेश की गई । यह आकर्षण का केंद्र बनी रही। इस अवसर पर शिवम कुमार आजाद, ओम प्रकाश सिंह, विवेकशील राघव ने अनेक देश प्रेम की कविता सुनकर लोगों का जोश बढ़ा दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजेंद्र प्रसाद सक्सेना ने एवं संचालन विवेकशील राघव ने किया।
इस मौके पर भानु प्रकाश सक्सेना, विपिन वार्ष्णेय,पूर्व विधायक यशपाल सिंह चौहान ,देवदत्त वर्मा, विमल माहेश्वरी,विजय भारत कुलश्रेष्ठ, किशनवीर सिंह, मित्रेश चतुर्वेदी, राजीव पुंढीर, सुशीला चौहान,मीरा माहेश्वरी, आरती त्रिवेदी, संतोष पौरुष, नीरज अग्रवाल, नीरज वैश्य,प्रवीण वार्ष्णेय, शिवलेश उपाध्याय, रामदत्त उपाध्याय, निधीश राज वार्ष्णेय , निखिल वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे।
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