
हाथरस अभिमान टूटे तो भगवान खुद द्वारपाल बन जाते हैं। राजा बलि से 3 पग भूमि मांगकर भगवान ने सिखाया कि दान में अहंकार नहीं होना चाहिए।
यह उद्गार अधिक मास के उपलक्ष में ब्रज के द्वार रुई की मंडी स्थित मंदिर ठाकुर श्री कन्हैया लाल जी महाराज परिसर में श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन व्यास पीठ से बोलते हुए कथा व्यास पं. श्री हरि सुरेशाचार्य जी महाराज वृंदावन ने व्यक्त किए। इस अवसर पर उन्होंने मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, परशुराम आदि अवतारों का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब राजा बलि का अभिमान टूटा तो भगवान उसके यहां द्वारपाल भी बन गए। कथा के समापन के बाद श्रीमद्भागवत जी की भव्य शोभायात्रा नगर में घुमाई गई। शोभायात्रा का जगह-जगह भव्य स्वागत हुआ। जबकि यज्ञ में पूर्ण आहूति के साथ भागवत कथा उत्सव संपन्न हुआ।
महोत्सव में मंदिर कमेटी की ओर से अध्यक्ष राजकुमार कोठीवाल के अलावा रमेशचंद्र शर्मा ब्रह्मचारी, मंदिर सेवायत पं.चेतन मिश्र, बौ. देवेश कौशिक, पं. राजा रंगीला, कन्हैयालाल घी वाले, आलोक वाष्र्णेय, मनोज वाष्र्णेय, सौरभ मोबाइल वाले, पूर्व सभासद पवन गुप्ता तेल वाले, ठा.पवन पौरुष, बांकेबिहारी वर्मा, दीपक वर्मा, एडवोकेट संजय दीक्षित, संजीव वर्मा आदि भक्तों का सहयोग सराहनीय रहा। इस अवसर पर काफी संख्या में महिला शक्ति एवं भक्तगण उपस्थित थे।












