
हाथरस। स्थानीय नगला बेलन शाह कोठी स्थित श्रीराम बगीची में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन बड़े ही श्रद्धाभाव के साथ शुरू हुआ है। आज कथा का विधिवत शुभारंभ नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष पं. आशीष शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पूजन कर किया गया।
इस अवसर पर पं. आशीष शर्मा ने कहा कि भागवत कथा केवल श्रवण मात्र के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए है। इस तरह के आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और युवा पीढ़ी को अपने संस्कारों से जुड़ने का अवसर मिलता है।कथा के प्रथम दिन आयोजित कलश यात्रा में क्षेत्रीय श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए। पीले वस्त्रों में सजी महिलाएं सिर पर कलश रखकर मंगल गान करती हुई कथा स्थल तक पहुँचीं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।।
प्रतिवर्ष होने वाला यह पारंपरिक आयोजन क्षेत्र की आस्था का केंद्र है।
आयोजक समिति ने बताया कि आगामी दिनों में कथा के दौरान भगवान के विभिन्न अवतारों और प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इस दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक उपस्थित थे।
समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व पालिका अध्यक्ष पं.आशीष शर्मा ने कहा कि सौभाग्य की बात है कि आज हमें पुनः इस पावन धरा श्री राम बगीची पर श्रीमद् भागवत महापुराण की अमृत वर्षा में भीगने का अवसर प्राप्त हुआ है। श्रीमद् भागवत कथा केवल सात दिनों का आयोजन नहीं है, बल्कि यह वह दर्पण है जिसमें मनुष्य को अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य का दर्शन होता है।आज के इस भागदौड़ भरे युग में, जहाँ मनुष्य मानसिक तनाव और अशांति से घिरा है, वहाँ भागवत कथा ही शांति का एकमात्र मार्ग है। भगवान की यह कथा हमें अहंकार का त्याग करना और निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करना सिखाती है। मेरा मानना है कि जिस स्थान पर प्रभु का संकीर्तन होता है, वहाँ की नकारात्मकता स्वयं ही समाप्त हो जाती है।मैं आयोजन समिति को साधुवाद देता हूँ कि वे प्रतिवर्ष इस परंपरा को जीवित रख रहे हैं, जिससे हमारी युवा पीढ़ी को धर्म और संस्कृति की शिक्षा मिल रही है। मेरा सभी श्रद्धालुओं से आग्रह है कि कथा को केवल सुनें नहीं, बल्कि इसमें बताए गए भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास भी करें।। इस मौके पर पूर्व पालिका अध्यक्ष पं. आशीष शर्मा के साथ-साथ आचार्य कमलेश, पप्पू सेठ, नानक चंद माहौर, दिनेश चित्तौड़िया, गोपाल मास्टर, विजेंद्र ठाकुर, रवि कुशवाहा, देवेंद्र कुमार, मानवेंद्र माहौर, अंकित कुशवाहा, मूलचंद कुशवाहा, कैला देवी, ममता, शांति देवी, कमलेश, पूजा देवी, राजू कुशवाहा, नेत्रपाल, रामकुमार, रमेश चंद्र आदि स्थानीय लोग उपस्थित थे।












