मेधावी छात्र किसी भी संस्थान और समाज की असली पूंजी होते हैं- पं. आशीष शर्मा

हाथरस स्थानीय अलीगढ रोड स्थित प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान राजेंद्र लोहिया विद्या मंदिर में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रतिभावान और मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि एवं उपप्रबन्धक, पूर्व पालिका अध्यक्ष पं. आशीष शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
प्रतिभा का सम्मान भविष्य की उड़ान समारोह को संबोधित करते हुए विद्यालय के उपप्रबन्धक एवं पूर्व पालिका अध्यक्ष पं.आशीष शर्मा ने कहा कि मेधावी छात्र किसी भी संस्थान और समाज की असली पूंजी होते हैं। उन्होंने छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कठिन परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही सफलता की एकमात्र कुंजी है। आज के युग में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है, ऐसे में हमारे विद्यार्थियों का यह प्रदर्शन सराहनीय है।
उन्होंने मेधावियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है। अनुशासन और निरंतर अभ्यास से ही ऊंचे मुकाम हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने उन मेधावी छात्रों का आवाह्न करते हुए कहा कि ऐसे मेधावी छात्रों को विद्यालय प्रबन्ध समिति द्वारा स्कॉलरशिप भी दिया जायेगा, जिनका परीक्षा परिणाम 90 प्रतिशत से ऊपर होगा। उन्होंने संतोष जताया कि विद्यालय विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारित करने में भी अपना अहम योगदान दे रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजेंद्र लोहिया विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य कपिल भाटिया ने कहा कि आज का दिन हमारे राजेंद्र लोहिया विद्या मंदिर के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह है। अभी-अभी हमने अपने उन होनहार सितारों को सम्मानित किया है, जिन्होंने अपनी मेहनत और अनुशासन से न केवल अपना, बल्कि इस विद्यालय का नाम भी रोशन किया है।आज यह जो प्रशस्ति पत्र आपके हाथों में है, यह केवल एक कागज का पन्ना नहीं है। यह आपकी रातों की नींद,आपके निरंतर अभ्यास और आपके संकल्प की जीत है।
सफलता का कोई छोटा रास्ता, शॉर्टकट नहीं होता, यह तो केवल कठिन परिश्रम और अनुशासन की नींव पर खड़ी होती है।आज जो छात्र सम्मानित हुए हैं,उनसे मैं बस यही कहूँगा कि यह अंत नहीं,बल्कि एक नई शुरुआत है। इस सम्मान के साथ आपकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। आपको समाज और देश के लिए एक उदाहरण बनना है और जो विद्यार्थी आज किसी कारणवश यहाँ मंच तक नहीं पहुँच पाए, उन्हें निराश होने की कतई आवश्यकता नहीं है। याद रखिए, मैदान में हारा हुआ इंसान फिर से जीत सकता है, लेकिन मन से हारा हुआ इंसान कभी नहीं जीत सकता। आपकी मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाएगी। बस अपनी कमियों को पहचानें और अगले साल के लिए अभी से जुट जाएँ। इन बच्चों की इस उपलब्धि के पीछे हमारे समर्पित शिक्षकों का मार्गदर्शन और अभिभावकों का अटूट विश्वास है। मैं सभी का आभार व्यक्त करता हूँ कि आपने इन कच्चे घड़ों को तराश कर एक सुंदर आकार दिया है।
कार्यक्रम के दौरान जब मेधावी छात्रों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए गए, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अतिथियों के हाथों सम्मान पाकर छात्रों के चेहरे खिल उठे। इस अवसर पर विद्यालय का समस्त स्टाफ, शिक्षकगण और अभिभावक उपस्थित थे। सभी ने विद्यालय प्रबंधन के इस प्रयास की सराहना की। कार्यक्रम में 90 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित करने वाले छात्र-छात्राओं में गीत रावत, ईशिता कुमार, ईशिका कुमार, अंशिका गोयल, अनुष्का वाष्र्णेय, गार्गी शर्मा, अंशिका गुप्ता, प्रांजल चैधरी, युवराज, नेन्सी अग्रवाल, रूद्र वाष्र्णेय, प्रियांशु अग्रवाल, हार्दिक अरोरा, श्रृष्टि शर्मा शामिल थे।
90 प्रतिशत दृष्टिबाधित छात्रा अनिष्का गोयल ने की अटूट हौसले की मिसाल कायम की है। अनिष्का गोयल कक्षा 10 की छात्रा राजेन्द्र लोहिया विद्या मन्दिर ने अपने अदम्य साहस और कड़ी मेहनत से हाईस्कूल परीक्षा में 92.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर एक नई मिसाल कायम की है। विशेष बात यह है कि अनिष्का गोयल 90 प्रतिशत दृष्टिबाधित हैं,इसके बावजूद उन्होंने अपने हौसले को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। जहाँ आमतौर पर लोग छोटी-छोटी चुनौतियों से घबरा जाते हैं, वहीं अनिष्का ने अपनी इस कठिन परिस्थिति को अपनी ताकत बना लिया। सीमित संसाधनों और अनेक बाधाओं के बावजूद उन्होंने निरंतर प्रयास किया और सफलता की ऊँचाइयों को छू लिया। अनिष्का की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और विद्यालय के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सच्ची सफलता उन्हीं को मिलती है जो कठिनाइयों से डरते नहीं, बल्कि उनका सामना करते हैं। उनकी यह सफलता हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जीवन में किसी भी प्रकार की बाधाओं का सामना कर रहा है। अनिष्का गोयल का यह संघर्ष और सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उज्ज्वल उदाहरण बनकर हमेशा याद रखा जाएगा।












