
हाथरस स्थानीय देहली वाला मौहल्ला स्थित श्री विष्णुस्वामी वैष्णव परम्परा के प्राचीन श्री मथुरानाथ जी महाराज मन्दिर में श्री रामनवमी का पर्व भारी श्रद्धा के साथ मनाया गया।
उत्सव का शुभारंभ प्रातः मंगला आरती के साथ हुआ। जहां श्री प्रभु को केशर जल से स्नान कराके सुन्दर केशरिया रंग की पोशाक और बहुमूल्य आभरणों से सुसज्जित किया गया। तदुपरान्त श्री रामजी का दूध, दही, घी, शहद, बूरा, केशरजल, जमुना जल से वेदमन्त्रोच्चारण के साथ महाभिषेक किया गया तथा राजभोग में कचैड़ी, पुआ, मोहनलाला, बूंदी, पेड़ा बर्फी, फलाहार का थाल आदि सामग्री भोग धराई गयीं। बधाई समाज गायन में मृदंग और झांझ के साथ-आज अयोध्या मंगलचार, अयोध्या बाजत आज बधाई, फूले फिरत अयोध्यावासी, आज महामंगल कौशलपुर सुनि नृप कें सुत चारभये आदि पदों का गायन हुआ तथा महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
वैष्णवाचार्य आचार्य श्री उपेन्द्र नाथ महाराज ने बताया कि श्री रामनवमी व्रत जयन्ती संज्ञक व्रत है, जो प्रत्येक सनातनी के लिए आवश्यक है। इस व्रत को करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं न करने से पाप लगता है। अतः प्रत्येक सनातनी को चारों जयन्ती व्रत करना चाहिए। युवाचार्य डा. गोपेश्वर चतुर्वेदी ने कहा कि श्री राम कण कण में व्याप्त हैं। प्रत्येक सनातनी के लिए राम प्रेरणास्रोत हैं।
महोत्सव में सोमेश चतुर्वेदी, विष्णु वाष्र्णेय, कैलाश मुसद्दी, गदाधर अग्रवाल, चेतन अग्रवाल आदि सैंकड़ों भक्त वैष्णव मौजूद थे।












