होली के पावन पर्व के समापन के बाद सोमवार को ग्रामीण अंचलों में बासौड़ा का पर्व पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सोमवार तड़के सुबह 5 बजे से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं का तांता लगना शुरू हो गया।
सोमवार को शहरी क्षे़त्र के साथ ग्रामीण अंचलों में भी महिलाओं ने माता शीतला की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं ने एक दिन पूर्व बनाए गए बासी भोजन और पकवानों का मां शीतला को भोग लगाया और परिवार की सुख-शांति व उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। मौसम के कारण चेचक और खसरा जैसी विभिन्न बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिन्हें शांत करने के लिए शीतला माता की आराधना की जाती है। इसी क्रम में महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्र के सीयल पर पहुँचकर माथा टेका और नगर की बाहरी सीमा की परिक्रमा की। इस परिक्रमा को नगर के लिए एक सुरक्षा चक्र माना जाता है, जिससे देवी माँ की कृपा बनी रहती है और किसी भी परिवार में व्याधि या बीमारी का प्रवेश नहीं होता। पूजा के उपरांत श्रद्धालुओं ने बासी भोजन का प्रसाद ग्रहण किया। पूरे दिन नगर और ग्रामीण क्षेत्रों की सीमाओं पर माँ शीतला के भक्तों की भारी भीड़ देखी गई और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।












