प्राइवेट स्कूलों में फीस वृद्धि व पाठ्यक्रम बदलने पर रोक लगाने की मांग

हाथरस-19 जनवरी। प्राइवेट स्कूलों संचालकों द्वारा हर वर्ष बदलने वाले पाठ्यक्रम, बेहताशा फीस वृद्धि व अन्य एक्टिविटी के नाम पर अविभावकों का आर्थिक शोषण किये जाने के खिलाफ शिक्षा सत्र 2026-27 प्रारंभ होने से पहले ही एडीएचआर प्रतिनिधि मंडल आज जिलाधिकारी से मिला और एक ज्ञापन जिलाधिकारी अतुल वत्स की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट प्रभारी उपजिलाधिकारी धर्मेंद्र सिंह को दिया।

राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने जिलाधिकारी अतुल वत्स को बताया कि प्राइवेट स्कूल संचालकों द्वारा अविभावकों का जमकर आर्थिक शोषण किया जाता रहा है। वेहताशा फीस वृद्धि, हर वर्ष पाठ्यक्रम बदलकर आदि अंयत्र साधनों से मनमानी की जाती है। चुनिंदा दुकानों को ठेका देकर अविभावकों को किताब खरीदने को मजबूर किया जाता है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने व अभिभावकों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अधिनियम,2018 लाया गया। उसके वावजूद भी प्राइवेट स्कूल संचालकों द्वारा अध्यादेश का खुला उल्लंघन करते है।


उक्त अधिनियम के अन्तर्गत आने वाले सभी स्कूल/ विद्यालय खुला उल्लघन करते हैं और किसी भी बदलाव-फीस बद्धि के लिए जनपद की जिला शुल्क नियामक समिति की अनुमति आवश्यक है। उक्त अधिनियम लागू होने के बाद से आज तक किसी प्रकार की अनुमति किसी भी विद्यालय/ स्कूल द्वारा नहीं ली जाती है। यह है कि फीस वृद्धि अध्यादेश के अनुरूप होनी चाहिये। फीस वृद्धि का आधार शिक्षा सत्र 2015-2016 को मानकर ही निर्धारण होना चाहिए। इसके अपितु फीस शिक्षा सत्र 2025-2026 मे फीस लगभग दोगुना (30 प्रतिशत -50 प्रतिशत) वसूली किन मापदण्डों के अनुसार की गई है।यह है कि प्रत्येक वर्ष पाठ्यक्रम बदलकर अविभावकों का आर्थिक शोषण किया जाता है। प्रत्येक वर्ष पाठ्यक्रम बदलने का क्या कारण है। अभिभावकों पर आर्थिक बोझ के रूप में पड़ता है और स्कूल संचालक प्राइवेट राइटरो से मोटा कमीशन लेकर राइटरों के नाम बदल कर अभिभावकों को हर वर्ष कोर्स खरीदने पर मजबूर करते है। छोटे से छोटे बच्चों का कोर्स 3हजार-4 हजार-10 हजार रुपयों का आता है, जिसमें देखा जाता है कि बहुत पतली पतली किताब है और ढाई -ढाई, तीन-तीन,पांच-पांच सौ रुपए की प्रिंट होकर आती है। यह सिर्फ और सिर्फ अभिभावकों को लूटने का कार्य है।केंद्र की ईकाई एनसीआरटी का सिलेबस क्यों नहीं पढाया जाता है। भारत सरकार की इकाई एनसीईआरटी की एक बुक भी किसी स्कूल में नहीं लगाई जाती है।
अंत में मांग की कि आगामी शिक्षा सत्र 2026-27 का पाठ्यक्रम बदलने पर पूर्णतय: रोक लगाकर पुराने पाठ्यक्रम से ही पढाई कराने एवं एनसीआरटी के पाठ्यक्रम से ही स्कूलों में पढाने के दिशा-निर्देश जारी किए जाये। साथ ही साथ फीस उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अधिनियम 2018 के अनुरूप शिक्षा सत्र 2015-2016 को आधार मानकर ही ली जाये।
जिलाधिकारी अतुल वत्स ने सुनकर नियमानुसार कार्यवाही की बात कही है।ज्ञापन देने वालों में राष्ट्रीय प्रवक्ता देवेन्द्र गोयल, जिलाध्यक्ष कमलकांत दोबरावाल, जिला महासचिव शैलेन्द्र सांवलिया, जिला कोषाध्यक्ष अनिल अग्रवाल,सौरभ सिंघल,राजेश वार्ष्णेय,रवि गुप्ता,आयुष अग्रवाल,दयाशंकर आदि उपस्थित थे।

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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