हाथरस। आर्य समाज मुरसान द्वार पर सीनियर सिटीजन एवं वृद्धजन तथा विधवा विधुर बन्धुओं का सामूहिक साप्ताहिक समागम बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया।
प्रभु धाम गमन जीवन साथी, अब वह संग नहीं है, वृद्धावस्था में जीवन का अब वह रंग नहीं है की इसी प्रेरणा स्रोत वाक्य के साथ कार्यक्रम विधवा ,विधुर , सीनियर सिटीजन, वृद्धजनो के समारोह में आचार्य दिनेश अग्निहोत्री पुरोहित के सानिध्य में वैदिक हवन, प्रवचन एवं भजनों के माध्यम से बहुत ही सुन्दर भव्य हृदयस्पर्शी कार्यक्रम का शुभारंभ आशुकवि बौहरे अनिल शर्मा तंबाकू वालों की अध्यक्षता में प्रारंभ हुआ। जिसका सफल संचालन राजीव आर्य द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रमुख उद्योगपति समाजसेवी नन्नूमल ग़ुप्ता सुपाड़ी वाले,विशिष्ट अतिथि फैम जिलाध्यक्ष सुरेश अग्रवाल थे।कार्यक्रम में पद्म वर्मा, प्रसिद्ध कवि गाफिल स्वामी एवं कवियत्री श्रीमती डा.नीलम वाष्णैय, श्रीमती उमा ज्योति ने सुंदर ज्ञानवर्धक भजनों का प्रवचन किया। कार्यक्रम में दिनेश आर्य, संजीव सिंघल, बॉबी लाला, पं. हरेंद्र शर्मा, शिवशंकर गुलाटी, गोवर्धन शर्मा, शैलेंद्र शर्मा,श्रीमती विजय आर्य, श्रीमती मंजू आर्य,संजय सिन्हा आदि ने भाग लिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त करते हुए वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार द्वारा भारतीय संस्कृति के तीव्र विकास हेतु गुरुकुलों को मान्यता देनी चाहिए एवं नवीन शिक्षण प्रणाली को गुरुकुल पद्धति के आधार पर अपनानी चाहिए, जिससे बच्चों में संस्कार युक्त, संस्कृत भावनाओं का विकास हो सके। वह बच्चे ही बुजुर्ग माता-पिता, वृद्धजनों का सम्मान कर सकते हैं। कॉन्वेंट में पढ़ने वाले बच्चे डिग्री प्राप्त कर नौकरी हासिल कर सकते हैं , उनका परिवार समाज और राष्ट्र से कोई सरोकार नहीं रहता। अच्छे बच्चों में संस्कार होना ही भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार एवं सभी के सम्मान का सूचक है। ईश्वर से पहले वृद्धजनों की सेवा नारायण का सच्चा स्वरूप है। कार्यक्रम के बाद ननन्नुमल गुप्ता सुपाड़ी वालों द्वारा सभी को प्रसाद ग्रहण कराकर कार्यक्रम का समापन करते हुए सभी को धन्यवाद दिया।आचार्य दिनेश अग्निहोत्री पुरोहित द्वारा शांति पाठ के साथ कार्यक्रम समापन हो गया।












