ऐतिहासिक संत तुलसी साहिब मंदिर है अमूल्य स्तंभ व आध्यात्मिक चेतना का केंद्र

पूर्व पालिका अध्यक्ष आशीष शर्मा के आवास पर हुआ भव्य दिव्य आध्यात्मिक मिलन कार्यक्रम

​हाथरस। स्थानीय किला गेट स्थित पूर्व पालिका अध्यक्ष पं. आशीष शर्मा के निज आवास पर आज एक अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक मिलन का आयोजन हुआ, जिसमें सुप्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक तुलसी साहब मंदिर के मुख्य गुरुजी श्री ज्ञानदास जी महाराज का भव्य आगमन हुआ। इस अवसर पर पं. आशीष शर्मा ने महाराज जी का गर्मजोशी से स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

​चर्चा के दौरान हाथरस के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि हाथरस स्थित तुलसी साहब का यह पावन मंदिर लगभग 300 वर्ष प्राचीन है। हाल ही में इस मंदिर का भव्य 183वां वार्षिक उत्सव अत्यंत हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ है। यह दिव्य भूमि और मंदिर हाथरस की सांस्कृतिक विरासत का एक अमूल्य स्तंभ है। पूर्व पालिका अध्यक्ष ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि यह उनका सौभाग्य था कि उनके अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान ही इस पावन स्थल के महत्व को देखते हुए इस मार्ग का नाम आधिकारिक रूप से तुलसी साहब मार्ग घोषित किया गया था।


​इस अवसर पर संत तुलसी साहिब के जीवन दर्शन और उनकी अमर वाणियों को याद किया गया। उनकी प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख करते हुए गुरुजी ने समाज को शांति और भक्ति का मार्ग दिखाया –राज सितारा पूना छोड़ा, तुलसी बन भाई हैं ।राज सभा तुलसी नहिं भाई, संत सभा मन भाई है।​वार्ता के क्रम में इस बात पर भी विशेष रूप से प्रकाश डाला गया कि हाथरस का यह तुलसी साहिब मंदिर केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि देश की बड़ी आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रहा है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, इसी तुलसी साहिब मंदिर के तृतीय/चतुर्थ शिष्य द्वारा लगभग 100 वर्ष पूर्व आगरा के स्वामी बाग में प्रसिद्ध राधा स्वामी मत की स्थापना की गई थी, जिसका मूल उद्गम इसी पावन धरा हाथरस से जुड़ा हुआ है।।
​पूर्व अध्यक्ष आशीष शर्मा ने अंत में आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी दिव्य धार्मिक विभूतियाँ और ऐतिहासिक स्थल हमारे प्यारे हाथरस के परम वैभवशाली इतिहास को सदैव सजाती और संवारती रहेंगी।

 

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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