
सासनी-16 जनवरी। कस्बा के आशानगर में मौजूद सुल्तानुल आरफीन हजरत ख्वाजा सूफी हाफिज अलाउद्दीन हसन शाह बिलाली की दरगाह पर चार दिवसीय शाह बिलाली का तीस वां उर्स मुबारक जुमे को संदल, गुसल जुलूस के बाद रात में दरगाह पर किए गये चिरांगा के साथ उर्स मुनाकिव हुआ।
सुल्तानुल आरफीन हजरत ख्वाजा सूफी हाफिज अलाउद्दीन हसन शाह बिलाली के तीसवें उर्स का प्रोग्राम कामयाब करने के लिए इंतजामिया कमेटी बनाई गई। इसकी सज्जादा गद्दी नशीन डॉ. इरशाद हसन बिलाली की सरपरस्ती और इरफान अली की सदारत में उर्स में चैथे और आखिरी दिन संदल गुसल जुलूस निकाला गया। जिसमें मुजफ्फरनगर से आए मुईन निजामी और उनके साथियों ने मेरी बात बन गई है तेरी बात करते-करते कव्वाली सुनाई। अलीगढ़ के कव्वाल शमीम अनवर ने कलियर के राजा जरा किरपा नजरिया पेश की, जबकि उस्मान जलाल हसन कव्वाल ने मैं हूं मांगता तेरा एक दाता है तू कव्वाली से समां बांधा। देश भर से आए जायरीनों और अकीकतमंदों ने रात भर कव्वालियों का लुफ्त उठाया। जुमे को सुबह डॉ. इरशाद हसन बिलाली की सरपरस्ती में संदल शरीफ का प्रोग्राम किया गया। यह बाबा शाह बिलाली की दरगाह शरीफ से शुरू होकर नानऊ रोड, आशा नगर, मोहल्ला कस्साबान और नगर के मुख्य बाजारों व मार्गों से गुजरा। संदल शरीफ का सफर शाह बिलाली की दरगाह शरीफ पर मुनाकिव हुआ। शाम को मगरिब की नमाज के बाद महफिल-ए-चिरागां का किया गया। जिसमें अकीकतमंदों और जायरीनों ने चिंरागे में हजारों दिए जलाकर दरगाह को रोशनी में नहलाकर मुल्क और कौम की सलामती की दुआ की। उर्स इंतजामिया कमेटी ने प्रशासन और पुलिस के सराहनीय सहयोग और व्यवस्था के लिए आभार व्यक्त किया, जिससे उर्स अमन-ओ-चैन से मुनाकिव हुआ।












