ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया

 संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने प्रथम प्रशासिका के रूप में किया था नियुक्त

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के आनंदपुरी कॉलोनी केंद्र पर ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां स्मृति दिवस शांति भवन में आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाया गया। उनकी याद में ब्रह्ममुहूर्त से योग-तपस्या का दौर जारी रहा। वहीं सुबह 8 बजे पुष्पांजली कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें संस्थान के सभी ब्रह्मा वत्स ने पुष्पांजली अर्पित की।


श्रद्धांजली कार्यक्रम में प्रशासिका राजयोगिनी शांता दीदी ने कहा कि मम्मा सदा कहती थीं हर घड़ी अंतिम घड़ी है। इसलिए वह सदा अलर्ट, एक्यूरेट रहती थीं। बाबा का कहना और मम्मा का करना, यह विशेषता थी। कैसी भी परिस्थिति आई लेकिन मातेश्वरी जी ने गंभीरता, धैर्यता के साथ सामना किया।

उनके बचपन का नाम ओम राधे था। जब आप ओम की ध्वनि का उच्चारण करती थीं तो पूरे वातावरण में गहन शांति छा जाती थी, इसलिए भी आप ओम राधे के नाम से लोकप्रिय हुईं। आप बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि और प्रतिभावान थीं। ब्रह्मा बाबा ने कोई भी ज्ञान की बात आपको कभी दोबारा नहीं सिखाई। आप एक बार जो बात सुन लेती थीं, उसी समय से अपने कर्म में शामिल कर लेती थीं। 24 जून 1965 को आपने अपने नश्वर देह का त्याग करके संपूर्णता को प्राप्त किया था। इसीलिए ब्रह्मा की बेटी सरस्वती जी को हमेशा युवा अवस्था में दिखाया जाता है।

उन्होंने कहा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की वर्ष 1937 में स्थापना के समय संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने जब माताओं-बहनों के नाम एक ट्रस्ट बनाया तो उसकी जिम्मेदारी सबसे पहले मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) को दी गई थी। तब से लेकर 24 जून 1965 तक आपने इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय की बागडोर बड़ी ही कुशलता के साथ निभाई। कम उम्र होने के बाद भी आपका गंभीर व्यक्तित्व और ज्ञान की गहराई से सभी अचंभित रह जाते थे। 24 जून 1965 को मम्मा के अव्यक्त होने के बाद ब्रह्मा बाबा ने राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि को संस्थान की कमान सौंपी थी। उनका जीवन वास्तव में ज्ञान, योग, धारणा और सेवा का जीवंत संगम था।
इस मौके पर आसपास की गीता पाठशालाओं से आए हुए सैकड़ो ब्रह्मा वत्स उपस्थित थे

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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