तहसील प्रशासन ने कोचिंग सेंटर, शोरूम, मॉल , लाइब्रेरी आदि की गहनता से की जांच ,मिली कई खामियां
खामियां दूर करने तक प्रतिष्ठानों को बंद करने के लिए निर्देश, बावजूद उसके खुले प्रतिष्ठान

सिकंदराराऊ। सोमवार को लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड के बाद प्रशासन की कुंभकरणीय नींद अचानक टूट गई। आनन – फानन में तहसील प्रशासन ने मंगलवार को शासन द्वारा प्रदेशव्यापी अभियान चलाया गया। जिसके तहत कस्बा में उपजिलाधिकारी धर्मेंद्र सिंह चौहान, पुलिस क्षेत्राधिकारी अमित पाठक और अग्निशमन विभाग की टीम ने कस्बा में स्थित शोरूम, लाइब्रेरी और कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों की गंभीर खामियां मिली । अधिकारियों ने खामियां दूर करने तक प्रतिष्ठानों को बंद रखने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद वे खुले रहे। निरीक्षण के दौरान राजघराना साड़ी सुहाग, बांके बिहारी शोरूम और आर. के. शोरूम जैसे प्रतिष्ठानों में फायर एनओसी, अद्यतन दस्तावेज और आपातकालीन निकास मार्ग की कमी सामने आई। अधिकांश प्रतिष्ठानों में ग्राहकों के लिए आने-जाने का केवल एक ही रास्ता था। राजघराना शोरूम पर एसडीएम ने स्वयं फायर सिलेंडरों की जांच की। संचालक ने बताया कि वे विद्युत एवं अग्निशमन विभाग से संबंधित दस्तावेजों की उपलब्धता और नवीनीकरण की जांच कर रहे हैं। किंतु शोरूम में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। एस.एल. लाइब्रेरी अंदर से बंद पाई गई । जिसे काफी देर तक आवाज लगाने के बाद कर्मचारी ने खोला। यहां बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे, लेकिन फायर सुरक्षा और आपातकालीन निकास की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। उपजिलाधिकारी ने छात्रों को सुरक्षा के महत्व के बारे में समझाया। कुछ लाइब्रेरियां बेसमेंट में संचालित हो रही थीं, जिनमें सुरक्षा मानकों का लगभग अभाव था। अधिकारियों द्वारा सुरक्षा खामियां मिलने पर प्रतिष्ठानों को बंद रखने के निर्देश दिए जाने के बावजूद आदेशों का पालन न होने पर सवाल उठ रहे हैं। कस्बावासियों का कहना है कि यदि प्रशासनिक आदेशों को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो ऐसे अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगे। इस जांच अभियान से संस्थान संचालकों में हड़कंप है, और लोग अब प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान बाजार में भारी अतिक्रमण भी पाया गया। आपातकालीन स्थिति में यह अतिक्रमण बचाव कार्यों में बाधा बन सकता है और पीड़ितों तक पहुंचने में मुश्किल पैदा कर सकता है। इसे देखते हुए उपजिलाधिकारी द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान भी चलाया जाएगा।












