हाथरस।सरकार द्वारा सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और आम उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत देने के उद्देश्य से चलाई जा रही योजनाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के मुंशी गजाधर सिंह मार्ग निवासी 91 वर्षीय अति वरिष्ठ नागरिक श्रीमती सुनीता कुमारी ने आरोप लगाया है कि उनके आवास पर स्थापित सोलर सिस्टम से उत्पादित बिजली की रीडिंग पिछले दो महीनों से मुख्य बिजली मीटर की रीडिंग से समायोजित (नेट मीटरिंग) नहीं की जा रही है। परिणामस्वरूप उन्हें हर माह पूरा बिजली बिल जमा करना पड़ रहा है।
वरिष्ठ नागरिक श्रीमती सुनीता कुमारी का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) के अधिकारियों से लगातार शिकायतें की हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उनके अनुसार विभागीय लापरवाही के कारण सोलर सिस्टम का कोई आर्थिक लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर 14 जुलाई को की गई शिकायत को मेरी शिकायत का बिना समाधान किये 21 जुलाई को निस्तारण किये गलत तरीके से हटा दिया,जिसकी सूचना मुझे मोबाइल पर एस.एम.एस. के माध्यम से प्राप्त हुई।
उन्होंने कहा कि जुलाई माह में ₹ 2935/- तथा अगस्त के बिजली बिल में 623 यूनिट की खपत दर्शाते हुए ₹3,689.60 का बिल जारी किया गया है, जबकि सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली का समायोजन नहीं किया गया। उनका कहना है कि यदि सोलर की बिजली का समुचित समायोजन हो जाए तो बिल में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
91 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने भावुक अपील करते हुए कहा है कि यदि विभाग हमारे सोलर की रीडिंग को बिल में समायोजित नहीं कर सकता, तो हमारा सोलर सिस्टम ही हटवा दीजिए । कम से कम बार-बार शिकायत करने और मानसिक तनाव झेलने से तो मुक्ति मिलेगी।उन्होंने राज्य सरकार और विद्युत निगम के उच्च अधिकारियों से अनुरोध किया है कि उनके मामले की निष्पक्ष जांच कराकर शीघ्र समाधान कराया जाए, ताकि उन्हें सोलर ऊर्जा योजना का वास्तविक लाभ मिल सके।
यह मामला न केवल एक अति वरिष्ठ नागरिक की परेशानी को उजागर करता है, बल्कि सौर ऊर्जा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इससे सोलर ऊर्जा अपनाने वाले अन्य उपभोक्ताओं का भी विश्वास प्रभावित हो सकता है।









