हाथरस। शहर में आज सवर्ण समाज और परशुराम सेना ने घंटाघर पर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया गया। विरोध प्रदर्शन के बाद सवर्ण समाज के लोगों द्वारा कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा गया और यूजीसी को वापस लिए जाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि यूजीसी कानून को लेकर सवर्ण समाज में चिंता और भय का माहौल है। उन्होंने मांग की है कि भारत के सवर्ण समाज की मांग पर इस कानून को वापस लिया जाए। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण नीति पर भी अपनी चिंता व्यक्त की।उनका कहना था कि आरक्षण लागू होने के कुछ वर्षों बाद से इसका लाभ वास्तविक गरीबों को नहीं मिल रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि आरक्षण का लाभ हर उस वास्तविक गरीब को मिले, जो उसका पूर्ण अधिकारी है, चाहे वह किसी भी जाति से हो।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि देश में दलितों द्वारा एससी-एसटी अधिनियम का दुरुपयोग पैसे कमाने के साधन के रूप में किया जा रहा है। इसमें कहा गया कि जब सवर्ण ऐसे झूठे मामलों में फंसते हैं और पैसे देने में असमर्थ होते हैं, तो वे या तो अपनी संपत्ति बेचते हैं या जेल जाने के डर से सपरिवार आत्महत्या कर लेते हैं।सवर्ण समाज ने सरकार से हस्तक्षेप कर उन्हें भय और चिंता मुक्त करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हर पार्टी वोट की राजनीति के कारण देश को दिशा देने वाले समाज के साथ खड़ा होने से डरती है और उनका समाज अत्याचार व प्रताड़ना का शिकार है।
इस दौरान भारतीय परशुराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष पं. राजू कौशिक, जिलाध्यक्ष विकास शर्मा, भारतीय परशुराम सेना के संरक्षक शरद उपाध्याय नंदा, किसान मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रमोहन पाराशर, डॉ. मोहन शर्मा, डॉ. अनिल शर्मा, राष्ट्रवादी प्रताप सेना के नितिन ठाकुर, व्यापार प्रकोष्ठ के पुनीत वाष्र्णेय, आशीष उपाध्याय, अतुल शर्मा, दीपू ठाकुर आदि मौजूद थे।









