हाथरस। नेत्रदान पखवाड़े के दौरान पहली बार शहर में देहदान कर्त्तव्य संस्था ने 127 वां नेत्रदान सौहार्दपूर्ण वातावरण में सफलता पूर्वक डा. श्राफ आई केयर वृंदावन के सहयोग से कराया गया है।। इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी एवं ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा (योगा पंडित)ने कहा कि संस्था ने पहली बार शहर में नेत्रदान कराया है, जोकि हम सभी को गर्वित कराने वाला प्रशंसनीय व अद्वितीय कार्य है।डॉ. एसके गौड़ को सक्रिय सदस्य शालिनी मित्तल का फोन आया कि संस्था सदस्य राजीव अग्रवाल मोनू की माता श्रीमती मधुबाला अग्रवाल का नेत्रदान होना है। डॉ. गौड़ ने तुरन्त डॉ. श्रॉफ आई केयर के डॉ. रोशन को सूचित किया। उन्होंने शीघ्रता से पहुँच कर मानवीय कदम को बखूबी अंजाम दिया। डॉ. गौड़ ने अपने संदेश में कहा कि ऐसे कार्योँ से मानवता को बल मिलेगा। इसमें पारिवारिक किसी सदस्य को बिल्कुल परेशान नहीं किया गया। सूचना मिलने पर शेष कार्य निर्विघ्न संस्था ने कराया।
उन्होंने सभी से आह्वान करते हुए कहा कि हम सभी को इस मुहिम में सहयोगी बनना चाहिए। डॉ. जयंत शर्मा (सचिव)ने अपने संदेश में कहा कि हाथरस में उठाया गया पहला कदम दर्शाता है कि लोग हमारे कार्यों को वरीयता दे कर सहयोगी बन रहे हैं। क्योंकि रूढ़िवादिता त्याग व लीक से हटकर मानवीयता को वरीयता देते हुए नेत्रदान को बढ़ावा देने में अग्रसर हो रहे हैं। इस कार्य में एडमिन राजीव का विशेष योगदान रहा।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि शहर के अलीगढ़ रोड स्थित बसंत बाग कॉलोनी निवासी प्रमुख समाजसेवी एवं व्यापारी राजीव अग्रवाल मोनू की करीब 78 वर्षीय माताश्री श्रीमती मधुबाला अग्रवाल पत्नी स्वर्गीय मोहनलाल अग्रवाल का आज सुबह निधन हो गया था और उनके मरणोपरांत भी अपने शरीर के महत्वपूर्ण अंग आंखों को दान कर दिया। हाथरस में पहली बार ऐसा मानवीय कार्य हुआ है और सबसे बड़ी बात कि पुत्र राजीव अग्रवाल के साथ साथ पूरे परिवार ने पूर्ण सहयोग करते हुए उनके द्वारा जीवित रहते हुए जो संकल्प लिया था, उसको पूर्ण कराया है। स्वर्गीय श्रीमती मधुबाला अग्रवाल का अंतिम दाह संस्कार आज श्री यमुना घाट मथुरा में कराया गया है।
नेत्रदान को लेकर प्रमुख समाजसेवी एवं ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा योगा पंडित ने कहा है कि किसी को चाहे जितनी धन दौलत दान कर दीजिए, उसके द्वारा उपलब्ध सुख सुविधाओं को व्यक्ति महसूस तो कर सकता है, उपयोग भी कर सकता है, लेकिन देख नही सकता इसलिए। किसी को रौशनी दान करना, अपनी आंख दान कर देने का मतलब उसको नया और उत्साहपूर्ण जीवन देना है।









