सांसदों के लिए कोल्ड ड्रिंक बैन, जनता के लिए खुली छूट – ये कैसा लोकतंत्र? आरटीआई में खुलासा : कोल्ड ड्रिंक हानिकारक: देगें ज्ञापन: करेंगें अपील

हाथरस। सांसदों के लिए कोल्ड ड्रिंक जहर, जनता के लिए अमृत? – संसद का दोहरा मापदंड उजागर हुआ है। हृयूमन राइट्स डिफेंडर/आरटीआई एक्टिविस्ट/राष्ट्रीय महासचिव एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक हृयूमन राइट्स प्रवीन वार्ष्णेय द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत लोकसभा सचिवालय से मांगी गई जानकारी में देश के सामने एक देश, दो कानून का सबसे बड़ा उदाहरण सामने आया है।
आज उक्त मामले को लेकर आयोजित महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता करते हुए प्रवीन वार्ष्णेय ने बताया कि मेरे द्वारा 4 जुलाई को आरटीआई के माध्यम से लोकसभा सचिवालय से 8 बिंदुओं पर सूचना मांगी गई कि संसद भवन परिसर में कोल्ड ड्रिंक/शर्करा युक्त पेय पदार्थों पर बैन है तो उसका आदेश क्या है? आधार क्या है? यदि ये सांसदों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं तो 140 करोड़ आम नागरिकों के लिए खुले में क्यों बिक रहे हैं? क्या स्कूल, अस्पतालों में भी बैन का प्रस्ताव है?।

प्रेस वार्ता में प्रवीन वाष्र्णेय ने बताया कि 30 जुलाई को लोकसभा सचिवालय ने जवाब में बताया गया कि संसद की कैंटीन में 6 अगस्त 2003 से कोल्ड ड्रिंक बैन हैं।उक्त आदेश 2003 का कहता है कि जॉइंट कमिटी फूड मैनेजमेंट के चेयरमैन ई अहमद एमपी के आदेश के अनुसार संसद परिसर में सभी ब्रांड की सप्लाई, विज्ञापन और फ्रिज तुरंत हटाने के आदेश दिए गए हैं।
इस आरटीआई से यह खुलासा होता है कि सरकार/संसद दोहरा मापदंड अपना रही हैं । पिछले 23 साल से देश के सांसदों की कैंटीन में कोल्ड ड्रिंक प्रतिबंधित हैं। लेकिन वही कंपनियां देश की 140 करोड़ जनता को यही जहर (प्रतिबंध के आधार पर) खुलेआम बेच रही हैं। सरकार को सासंदों के स्वास्थ्य की ज्यादा फिक्र है। देश के 140 करोड़ देश के नागरिकों के स्वास्थ्य का कोई महत्व नहीं है। जेपीसी ने कोल्डड्रिंक हानिकारक होने पर अपने संसद परिसर में बैन करके देश 140 करोड़ देशवासियों को उनके हाल पर छोड़ दिया।
सरकार/लोकसभा सचिवालय आधार छुपा रहा है। सरकार /लोकसभा सचिवालय ने अभी भी यह नहीं बताया कि बैन का वैज्ञानिक आधार क्या है।
प्रेसवार्ता के दौरान प्रवीन वाष्र्णेय ने मांग करते हुए कहा है कि सरकार तुरंत देश भर में कोल्ड ड्रिंक/उच्च शर्करा पेय को संसद की तरह पूरी तरह बैन करे और स्कूल,कॉलेज अस्पताल, सरकारी कार्यालयों में इनकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाए।साथ ही साथ संसद द्वारा अपने लिए लागू मानकों को पूरे देश के लिए भी लागू किए जाएं।जब देश के नीति-निर्माताओं के लिए कोई चीज जहर है, तो वो देश की जनता के लिए अमृत कैसे हो सकती है? यह सीधा-सीधा 140 करोड़ देशवासियों के स्वास्थ्य और समानता के मौलिक अधिकारों पर हमला है और सरकार इस दोहरे मापदंड को तुरंत खत्म करे।
अभी पूरी जानकारी के लिए प्रथम अपील की जायेगी, जिससे पूर्ण सच्चाई देश के सामने आ सके और साथ ही साथ एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम सौंपा जायेगा।।
प्रेसवार्ता मे जिलाध्यक्ष कमलकांत दोवराबाल, जिला महासचिव शैलेन्द्र सांवलिया, उपवेश कौशिक, राजेश वार्ष्णेय उपस्थित थे।

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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