सत्संग में श्री कलाधर जी महाराज ने दिया प्रभु भजन का संदेश
जैतपुर। दिव्य योग कला मंदिर जैतपुर में श्री श्री 1008 कलाधर जी महाराज के पावन सान्निध्य में भव्य सत्संग कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर सत्संग का लाभ प्राप्त किया।
सत्संग को संबोधित करते हुए श्री कलाधर जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य ईश्वर की भक्ति और नाम-स्मरण है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रसिद्ध चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा—बारि मथें घृत होइ बरु, सिकता ते बरु तेल।बिनु हरि भजन न भव तरिअ, यह सिद्धांत अचेल॥
महाराज जी ने कहा कि जिस प्रकार पानी मथने से घी और रेत से तेल निकलना असंभव है, उसी प्रकार प्रभु भजन के बिना इस संसार रूपी भवसागर से पार पाना भी असंभव है। यह सनातन और अटल सत्य है।
उन्होंने कहा कि जो सुख सत्संग में है, वह बैकुंठ में भी दुर्लभ है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन भगवान के नाम का जप अवश्य करना चाहिए। विशेष रूप से सावन माह के आगमन को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रातः एवं सायंकाल भगवान शिव के नाम का जप और नियमित पूजा-अर्चना करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।श्री कलाधर जी महाराज ने कहा कि सावन का पावन महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस माह में श्रद्धा, भक्ति और साधना का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि संसार में भगवान शिव और सद्गुरु ही ऐसे हैं जो बिना किसी भेदभाव और बिना नाप-तोल के अपनी कृपा बरसाते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने सांसारिक कर्तव्यों का पालन करते हुए योग, साधना और प्रभु भक्ति को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।

सत्संग के अंत में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन एवं गुरु वंदना के साथ आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया तथा समाज में धर्म, सेवा और सदाचार का संदेश प्रसारित करने का संकल्प लिया।









