जानवरों को मारने-काटने वाले, उनके मांस को लाने वाले, पकाने वाले, परोसने-खिलाने वाले, खाने वाले, सबको बराबर पाप लगता है

सन्तों की वाणी इंसान के अंदर जगह बनाती है और जरूरत पड़ने पर विकसित हो जाती है इसीलिए कहा जाता है कि बच्चों को भी सतसंग में लाना चाहिए।

थोलई सिकंदराराऊ, हाथरस, उत्तर प्रदेश परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 3 जुलाई सतसंग में कहा कि आप मांस, मछली, अण्डा मत खाना, शराब या शराब जैसे बुद्धिनाशक नशे का सेवन कभी मत करना। मांस, अण्डा खाने से जीव हत्या का पाप लगता है और उसकी सजा मिलती है। इनको खाने से जो खून बनता है, वह शाकाहारी खून से मेल नहीं खाता है और शरीर में तरह-तरह की बीमारियां पैदा हो जाती हैं।


यह शरीर, मानव मंदिर है, जिस्मानी मस्जिद है, टेंपल ऑफ लिविंग गॉड है। इसलिए इसमें कोई भी गंदी चीज जैसे मांस, मछली, अण्डा व शराब डाल कर इसे गंदा मत करना। हमारी आपसे यह प्रार्थना है कि
“हाथ जोड़कर विनय हमारी तजो नशा बनो शाकाहारी,
छोड़ो व्यभिचार बनो ब्रह्मचारी सतयुग लाने की करो तैयारी”
लोगों को सतयुग में रहने लायक बना लो। सतयुग में कोई भी मांसाहारी, व्यभिचारी, शराबी, सटोरिया-जुआरी नहीं होगा, तो आप बुराइयों से दूर रहना। और जिनको भी किसी भी तरह की तकलीफ है, आप सब लोग रोज सुबह शाम एक घंटा ‘जय गुरु देव’ नाम की ध्वनि बोलना;
“जय गुरु देव, जय गुरु देव, जय गुरु देव, जय-जय गुरु देव”।

जो बच्चे बराबर सतसंग में आते रहते हैं, वे बिगड़ते नहीं हैं।

जानवरों को मारने-काटने वाले, उनके मांस को लाने वाले, पकाने वाले, परोसने-खिलाने वाले, खाने वाले, सबको बराबर पाप लगता है। इसीलिए आप पाप से दूर रहना नहीं तो जब युग परिवर्तन होता है तब बहुत मरते हैं।
आपके बच्चों एवं बच्चियों पर आप लोग नजर रखो क्योंकि इस समय पर कुछ ऐसे तत्व हैं जो पैसा कमाने के चक्कर में उनकी आदत खराब कर रहे हैं और उन्हें गंदे धंधों में लगा रहे हैं। आप अपने बच्चों का ध्यान नहीं रखोगे तो उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। इसीलिए आपको उन पर थोड़ा ध्यान रखने की जरूरत है।
सन्तों की जो वाणी होती है, वह इंसान के अंदर में जगह बनाती है। वह वाणी अंदर पड़ी रहती है और फिर जरूरत पड़ने पर विकसित हो जाती है। इसीलिए कहा जाता है कि बच्चों को भी सतसंग में लाओ। जो बच्चे बराबर सतसंग में आते रहते हैं वे बिगड़ते नहीं हैं।
लेकिन जो लोग नहीं लाते हैं, गलत बच्चों का साथ पड़ जाता है तो वही बच्चे बिगड़ जाते हैं। वे सारी धन-दौलत बर्बाद कर देते हैं और कुल खानदान के कलंक बन जाते हैं।

घर में लड़ाई-झगड़े से बचने के लिए एक को गुस्सा आवे तो दूसरा शांत हो जाओ।

कहा गया है, “कहीं भागे मर्द और कहीं मारे मर्द” एक आदमी ने कहा कि हमारे पिताजी बहुत बलवान थे। किसी को कुछ नहीं समझते थे। तब लोगों ने पूछा कि तब क्या हुआ? तो वह बोला “अरे! हुआ क्या? बहुत बहादुर थे तो एक दिन बाघ से लड़ गए” लोगों ने पूछा कि “वो तो ठीक है लेकिन यह बताओ कि परिणाम क्या निकला?” तो बोला “अरे भाई क्या बतावें! बाघ ने उनके एक पैर पर पैर रखा और दुसरे से उनको पकड़ कर के फाड़ दिया और वे दो हिस्सा हो गए” तो आप ही बताओ कि बहादुरी कहां गई?
घर में लड़ाई-झगड़े से बचने के लिए अगर पति को गुस्सा आए तो पत्नी चुप हो जाए, पत्नी को गुस्सा आए तो पति चुप हो जाए, भाई को गुस्सा आए तो दूसरा भाई चुप हो जाए तो झगड़ा नहीं हो सकता है। तो और कोई अगर आग हो तो आप बिल्कुल ठंडे पड़ जाओ, उसके पैर पड़ जाओ तो वह आपको झुक कर के उठाएगा।

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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