
हाथरस- सावन कृपाल रूहानी मिशन के बैनरतले जनपद की तीनों शाखाओं क्रमशः कृपाल आश्रम गौशाला मार्ग, कृपाल आश्रम, पिछोंती हसायन एवं राजिंदर आश्रम वीरनगर पर आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग दयाल पुरुष संत दर्शन सिंह जी महाराज एवं मिशन के प्रमुख व विश्व आध्यात्मिक सतगुरू संत राजिंदर सिंह जी महाराज की पवित्र वाणी में ऑडियो वीडियो द्वारा श्रवण कराया गया।
संत दर्शन सिंह जी महाराज ने संत कबीर साहेब जी महाराज की वाणी-जाग प्यारी तू अब काहे को सोबै, रात गयी दिन काहे खोबै। द्वारा समझाया और कहा कि युगों युग बीतते गए और हमारी आत्मा बार बार परमात्मा से बिछड़ती रही। चैरासी लाख योनियों के चक्र में फँसती रही है। इस समय को संत कबीर दास जी ने काली अँधेरी रात की तरह माना है और जब हम पर परमात्मा की असीम कृपा हुई, तब जाकर हमें मनुष्य रूपी नर नारायणी देह मिली है। मनुष्य जीवन को उन्होंने सवेरा अर्थात जागृति के माफिक माना है।
महाराज जी ने बताया कि जब हमारी आत्मा को मानव चोला मिल जाता है, अर्थात आत्मा को जागृति मिल गयी है, इसके बाद प्रभु कृपा से जब हमारे जीवन में एक पूर्ण संत सतगुरु की आमद होती है तो वो पूर्ण सतगुरु हमारी आत्मा को उभार प्रदान करके आत्मा के मूल स्रोत के दर्शन करा देते हैं।
इसी श्रृंखला में संत राजिंदर सिंह जी महाराज ने सत्संग प्रेषित किया और समझाया कि हमारे इस मनुष्य जीवन का एक ही परम लक्ष्य है और वो है स्वयं को सही रूप में जानना व आत्मा को प्रभु के वास्तविक स्वरूप के दर्शन कराते हुए पिता पर्मेश्वर में लीन कराना। महाराज जी ने आगे फरमाया कि हरेक माता पिता हमेशा अपने बच्चों के बेहतर जीवन की कामना करते हैं। वो चाहते हैं कि हमारे बच्चों का जीवन सदा सुखमय हो, दुखों रहित हो। ठीक इसी तरह परमात्मा भी हम सब का भला चाहते हैं। इसलिए हमें इस धरती पर अपना जीवन प्रेम, सदाचार, नेकी और निष्काम सेवा से भरपूर जीना चाहि।
सत्संग के अवसर पर मिशन की तीनों शाखाओं पर मिशन के दिशा निर्देशों के अनुरूप विभिन्न प्रकार की अलग अलग निःशुल्क गतिविधियां जैसे, बाल सत्संग, निःशुल्क राजिंदर सिलाई सेंटर, दर्शन लाब्रेरी, आध्यात्मिक बुक स्टाल, आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, एलोपैथिक डिस्पेंसरी, कृपाल प्याऊ आदि भी संचालित की गयीं। सत्संग के पश्चात सभी संगत हेतु लंगर प्रसाद का भी वितरण किया गया। सभी संगत द्वारा सत्संग श्रवण के साथ साथ केंद्र पर आयोजित होने वाली गतिविधियों का स्वयं की आवश्यकता के अनुसार लाभ उठाया। उक्त कार्यक्रम को सफल बनाने में मैनेजमेंट के सभी सदस्यों व कर्मठ सेवादारों ने अपना अमूल्य सहयोग प्रदान किया।









