
नई दिल्ली-7 फरवरी। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने वाराणसी के मणिकार्णिका घाट पर स्थापित लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को खंडित किए जाने तथा साथ में सैकड़ों मंदिरों को ध्वस्त किए जाने पर सरकार की तीव्र आलोचना की।
उन्होंने कहा कि अभी हाल में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सरकार ने देश के सामने अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की थी कि वे देश की सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने और संवारने का काम करेगी, लेकिन अभी हाल में वाराणसी के मणिकार्णिका घाट पर लोकमाता अहिल्याबाई की मूर्ति पर बुलडोजर चलाकर तथा सैंकड़ों मंदिरों को ध्वस्त करके न सिर्फ वादा खिलाफी की है, अपितु देश की सांस्कृतिक विरासत नष्ट करने का काम किया है।
सांसद श्री सुमन ने कहा कि वे लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की स्मृति को प्रणाम करते हैं और काशी हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। न सिर्फ पाल, बघेल या धनगर समाज के लोग जो अपने आपको लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का वंशज मानते हैं, अपितु पूरा राष्ट्र लोकमाता अहिल्याबाई के कुशल प्रशासन, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक न्याय की प्रतीक को अपना आदर्श मानता है। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की काशी में न सिर्फ मूर्ति को तोड़ा गया है, अपितु करोड़ो लोगों के दिलों को तोड़ा गया है। घटना की जानकारी मिलने पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने काशी में वस्तुस्थिति की जानकारी करने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल का गठन किया। राज्य सरकार ने अपने गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए उस प्रतिनिधिमंडल को घटनास्थल पर नहीं जाने दिया। राज्य सरकार नहीं चाहती थी कि उसका असली स्वरूप देश के सामने उजागर हो।
लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का व्यक्तित्व कितना विराट था, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एनी बेसेंट ने अपनी पुस्तक चिल्ड्रेन ऑफ दी मदरलैंड, इतिहासकार गोविंद सखाराम ने 1933 में लिखी अपनी किताब दी मैन करेंटस ऑफ मराठा हिस्ट्री, 1849 के बंगाल गजट तथा पं. जवाहरलाल नेहरू ने अपनी किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया (भारत एक खोज) में भी लोकमाता अहिल्याबाई के शासन की प्रशंसा की है। लोकमाता ने 1767 से 1795 तक शासन किया और उन्होंने अपनी राजधानी इंदौर से स्थानांतरित करके महेश्वर कर दी। अपने शासनकाल में उन्होंने पूरे देश में मंदिर बनवाए, मंदिरों का जीर्णोद्धार किया, घाट-कुएं-तालाब तथा बड़े पैमाने पर धर्मशालाओं का निर्माण कराया। अयोध्या, काशी, मथुरा, हरिद्वार, उज्जैन, द्वारिका, नासिक तथा सोमनाथ के मंदिरों की पुनर्स्थापना को भला कैसे भुलाया जा सकता है। भारतीय समाज में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का स्थान सदैव अमर रहेगा।









