अनूप शर्मा

सिकंदराराऊ। चाइनीस माझों से हो रही घटनाएं लगातार प्रकाश में आ रही हैं। बाबजूद इसके कस्बा में चाइनीज मांझों की बिक्री बेखौफ होकर की जा रही है। देशी मांझा से सस्ता होने के चलते चाइनीज मांझा की बिक्री ज्यादा होती है। प्रतिबंधित होने के बावजूद बाजारों में चाइनीज मांझा गली मोहल्लों में धड़ल्ले से बिक रहा है। जिम्मेदारों द्वारा ऐसे दुकानदारों के उपर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
पतंगबाजी के लिए बाजार में इन दिनों प्रतिबंधित मांझे की बिक्री कस्बा में तेजी से हो रही है। प्रशासन भी इसके रोकथाम को लेकर गंभीर नहीं हो रहा है। सामान्य मांझे की अपेक्षा चाइनीज मांझा सस्ता होता है। काटने की तेज क्षमता के कारण पतंगबाज चाइनीज मांझे को सबसे अधिक पसंद करते हैं। बाजारों में चाइनीज मांझे आसानी से मिल जाते हैं। कस्बा के गली मोहल्लों में चाइनीज मांझे की जमकर बिक्री हो रही है। प्रतिबंधित होने के बाद भी कस्बा के बाजारों में चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक नहीं लग पा रही है। कम दाम के आकर्षण, सूती की जगह नायलान और प्लास्टिक धागे पर चढा लोहे-कांच का बुरादा उसे ज्यादा धारदार जानलेवा बना रहा है। चाइनीज मांझे की चपेट में आकर पतंगबाजों, राहगीरों, दुपहिया वाहन चालकों की उंगलियों, गर्दन, मुंह और हथेली घायल हो जा रही है। चाइनीज मांझे पर रोक के बावजूद कस्बा में इसकी बिक्री बेखौफ की जा रही है। कई बार पतंग उड़ाते समय मांझा गले में फंसने से जान पर बन आता है। इसके बाद भी प्रशासन की तरफ से कार्रवाई नहीं की जा रही है।









