
उत्तर प्रदेश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित और उज्जवल बनाने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। अब पुलिस वेरिफिकेशन (सत्यापन) रिपोर्ट आने में देरी होने के कारण चयनित युवाओं की नौकरी नहीं रोकी जाएगी। सामान्य पदों पर नियमानुसार अस्थायी नियुक्ति दी जाएगी, जबकि पुलिस अपनी जांच समानांतर रूप से जारी रखेगी। सरकार ने पुलिस के लिए भी यह अनिवार्य कर दिया है कि वे 30 दिनों के भीतर अपनी सत्यापन रिपोर्ट दें। हालांकि, सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील पदों पर यह छूट लागू नहीं होगी।
गुरूवार को अपने एक बयान में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी यतेन्द्र शर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि पहले सपा और बसपा की सरकारों में युवा परीक्षा पास करने के बाद भी पुलिस वेरिफिकेशन और दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर होते थे। लंबित एफआईआर का मतलब स्वतः अयोग्यता नहीं होगा, बल्कि मामले की प्रकृति को देखकर और उम्मीदवार को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देकर निर्णय लिया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इस सकारात्मक पहल को कुछ लोग भ्रम फैलाकर गलत नजरिए से पेश कर रहे हैं। युवाओं को तारीखों और फाइलों के फेर से राहत मिलने से विपक्ष की राजनीति को झटका लगा है, इसलिए वे भ्रामक नैरेटिव गढ़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून पहले से मौजूद था, लेकिन पिछली सरकारों में इसकी आड़ में युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता था। योगी सरकार ने पारदर्शी व्यवस्था लागू कर यह सुनिश्चित किया है कि नियम भी कड़े रहें, जांच भी हो और युवाओं का भविष्य भी बेवजह न अटके।









