हाथरस। वरिष्ठ कार्यकर्ता संगठन की रीढ़ होते है। युवा कार्यकर्ताओं को उनके अनुभवों का लाभ लेना चाहिये। संघ की शताब्दी वर्ष तक की गौरवशाली यात्रा में संघ के स्वयंसेवको ने स्वयं को समर्पित किया। संघ के प्रारम्भ में समाज की उपेक्षा ,मध्यकाल में विरोध को सहा, लेकिन हिन्दू समाज संगठित रहे और भारत माता की विश्व में जय जयकार हो, इस लक्ष्य को लेकर संघ निरन्तर आगे बढ़ता रहा।। उक्त बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण गतिविधि के अखिल भारतीय सह संयोजक राकेश जैन ने कहीं। वह श्री रामबाग इंटर कॉलेज में वरिष्ठ स्वयंसेवको के साथ सुख दुख पर चर्चा विषय पर आयोजित गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल थे। गोष्ठी का शुभारंभ वंदे मातरम के समूहिक गान से हुआ।

विद्यालय के प्रबंधक ओमप्रकाश वर्मा एवँ अध्यक्ष नरेश वर्मा ने मंचासीन अतिथियों पर्यावरण गतिविधि के अखिल भारतीय सह संयोजक राकेश जैन ,जगतगुरू शंकराचार्य आश्रम के प्रमुख महन्त सहजानन्द जी ब्रह्मचारी शक्तिपीठ शाकुम्भरी देवी,नगर संघचालक डॉ. पीपी सिंह का प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।
मुख्य अतिथि राकेश जैन ने गोष्ठी को संबोधित करते हुये कहा कि अथक परिश्रम और शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार रहा है । वरिष्ठ स्वयंसेवकों ने जिस संघ रूपी वृक्ष को कठिन परिश्रम से सींचा वह आज वट वृक्ष बन चुका है,जिसकी छाया में एकजुट हिन्दू समाज खड़ा है।उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संगठन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए। पेड़-पौधे आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, जल और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को अधिक से अधिक पौधे लगाने चाहिए और उनका संरक्षण भी करना चाहिए। उन्होंने जल संरक्षण करने तथा प्लास्टिक का प्रयोग न करने की बात कही। उन्होंने पर्यावरण के लिये प्रतिदिन 15 मिनट देने का आह्वान किया।
गोष्ठी में वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा किये।वहीँ उन्होंने अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये।अंत मे गोष्ठी संयोजक पूर्व सह जिला कार्यवाह सुरेश बागड़ी ने सभी का आभार व्यक्त किया। संचालन सेवा भारती के जिलाध्यक्ष डॉ. बीपी सिंह ने किया। विशेष सहयोग जिला सेवा प्रमुख योगेश बागड़ी एवँ सेवा भारती जिला मंत्री राजीव आर्य का रहा। गोष्ठी में वर्तमान एवँ पूर्व के दायित्वान व कार्यकर्ता सम्मलित थे।









