अनूप शर्मा

सिकंदराराऊ। क्षेत्र में पशुओं में फैल रहे खुरपुरा -मुंहपका (एफएमडी) रोग ने पशु पालकों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। पशु चिकित्सा विभाग के दावों के बावजूद गाय,भैंस और बैल समेत सैकड़ों पशु इस बीमारी की गिरफ्त में है। इस रोग के चलते बड़ी संख्या में पशुओं की मौत भी हो चुकी है । जिससे ग्रामीण चिंतित हैं।
बताया जाता है कि पशु चिकित्सा विभाग द्वारा करीब 6 माह पूर्व क्षेत्र में पशुओं के खुरपका, मुंहपका रोग के टीके लगाए गए थे। इसके बावजूद नवंबर माह से बीमारी का प्रसार शुरू हो गया। इस रोग से पशुओं के पैरो में सूजन आ जाती है। मुंह में छाले और घाव हो जाते है। जिससे उन्हें चलने फिरने एवं खाने पीने में भारी परेशानी होती है। कई मामलों में मुंह से खून गिरने लगता है और कमजोरी बढ़ने से पशुओं की मौत भी हो जाती है। गांव सिंधौली निवासी रवि, पप्पू , वासुदेव की गायों की इस बीमारी की चपेट में आकर मौत हो चुकी है। गांव गढ़िया बरगंवा निवासी महेश की भैंस और राजपाल का बैल तथा वीरेंद्र उर्फ भुल्ला की दो भैंसों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। गांव देवीपुर में पीतम सिंह की भैंस तथा राजकुमार और ओंकार की गायों की भी इस बीमारी की चपेट में आकर मौत हो चुकी है। गांव सराय में खूब लाल,विनोद , महीपाल,नाथू फौजी ,भगवान सिंह की दर्जन भर से अधिक भैंसे इस रोग से ग्रसित है। गांव महामई सलावत नगर में स्थित गौशाला में भी कई गाये लंगड़ा कर चल रही है, जो बीमारी का संकेत है। इस बीमारी के चलते पशुपालको को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पशुओं में फैल रही बीमारी की रोकथाम के लिए पशु चिकित्सा विभाग सक्रिय हो गया है । इस संबंध में पशु चिकित्सा अधिकारी किसी लोधी ने बताया कि 22 जनवरी से क्षेत्र में दोबारा टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा । पशु चिकित्सा अधिकारी ने पशु चिकित्सकों से गलत इलाज न करने की अपील की है।









