मन वाणी बुद्धि आदि द्वारा किए गये प्रत्येक कर्म भगवान को अर्पण करना ही भागवत धर्म है

हाथरस। स्थानीय चौबे वाली गली स्थित श्री बैकुंठनाथ मन्दिर में शिक्षाविद् आचार्य श्री ब्रजेन्द्रनाथ चतुर्वेदी की स्मृति में आयोजित श्री मद्भागवत कथा के दौरान आचार्य श्री उपेन्द्रनाथ जी महाराज ने भागवत धर्म की चर्चा करते हुए बताया कि मन, इन्द्रिय, वाणी, बुद्धि ,स्वभाव आदि द्वारा जो भी कर्म करें ,उसे भगवद् अर्पित करना ही भागवत धर्म का मूल मन्त्र है।

भागवत आचार्य उपेंद्र नाथ जी महाराज ने कहा कि कथा सुनना ,कीर्तन करना और सतत स्मरण करना भक्ति का साधन है और श्रीमद्भागवत कथा का मूल उद्देश्य जीव के मानस पटल पर भक्ति का उदय होना ही है ।कथा आचार्य ने श्री कृष्ण उद्धव संवाद में दत्तात्रेय जी के चौबीस गुरु, भागवत धर्म, योग और भक्ति के विषय में गम्भीरता पूर्वक प्रवचन दिया । सायं कालीन सत्र में श्रीकृष्ण का स्वधाम गमन , परीक्षित मुक्ति, कलियुग लक्षण , मार्कण्डेय ऋषि कि कथा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का विश्राम हुआ । कथा विश्राम के उपरान्त विश्व हिंदू परिषद के अर्चक पुरोहित नरेन्द्र सिंह एवं राजेन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने उत्तरीय एवं पुष्प माला भेंट कर स्वागत किया। श्री मद्भागवत की परावर्तन यात्रा कथा स्थल श्री बैकुंठनाथ मन्दिर से दिल्ली वाला मोहल्ला स्थित श्री मथुरानाथ जी महाराज मन्दिर में हरिनाम संकीर्तन के साथ पूर्ण हुई।
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान अनिल चतुर्वेदी, गोपाल चतुर्वेदी, आनन्द चतुर्वेदी, पीयूष चतुर्वेदी,पंकज चतुर्वेदी, प्रवीण चतुर्वेदी, पुनीत चतुर्वेदी, नवीन चतुर्वेदी, राजेन्द्र नाथ चतुर्वेदी, हरि ,देवू ,रामू आदि मौजूद थे।

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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