कुएं को तोड़े जाने का लोगों ने किया पुरजोर विरोध:आरओ लगाने के उद्देश्य से सार्वजिक कुएं को नगर पालिका के ठेकेदार ने तुड़वाया
सिकंदराराऊ । कस्बा की पुरानी तहसील रोड मोहल्ला मटकोटा में स्थित वर्षों पुराने सार्वजनिक कुएं को नगर पालिका के ठेकेदार ने आरओ लगाने के उद्देश्य से बुधवार को जेसीबी मशीन द्वारा तोड़ दिया गया। कुआँ तोड़ने जाने से स्थानीय लोगों में रोष पनप गया और मौके पर लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। लोगों ने कुएं को तोड़े जाने का पुरजोर विरोध किया। जिससे मौके तनाव की स्थिति बन गई। सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई । पुलिस ने आक्रोशित लोगों को समझा बुझाकर शांत किया। बाद में प्रभारी निरीक्षक शिवकुमार शर्मा ने ठेकेदार को पुनः कुएं की दीवार लगाने के निर्देश दिए। जिसके बाद मामला शांत हो सका।
बताया जाता है कि मोहल्ला मटकोटा में सामाजिक परंपराओं और आस्था से जुड़ा हुआ एक वर्षों पुराना कुआं है। बुधवार की सुबह 11 बजे करीब मोहल्ले में तनाव की स्थिति जब उत्पन्न हो गई। जब नगर पालिका का ठेकेदार अचानक जेसीबी मशीन लेकर कुएं पर पहुंच गया और देखते ही देखते जेसीबी मशीन से कुएं को तोड़े लगा। वर्षों पुराना कुआँ सामाजिक परंपराओं और आस्था से जुड़ा होने के कारण मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। लोगों ने वर्षों पुराने कुएं को तोड़ने का पुरजोर विरोध करने लगे। लोगों का कहना था कि यह कुआं केवल एक पुराना जलस्रोत नहीं था, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक परंपराओं और आस्था से जुड़ा हुआ था। इस कुएं पर वर्षों से कुआं पूजन की परंपरा चली आ रही थी। शादी-विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर परिवार यहां पूजा-अर्चना करते थे। ऐसे में कुएं को तोड़े जाने से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। धीरे -धीरे मामला गरमाने लगा। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना पाकर मौके पर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक शिवकुमार शर्मा पुलिस बल के साथ पहुंच गए।

जहां उन्होंने आक्रोशित लोगों को समझा बुझाकर शांत किया और ठेकेदार को पुनः कुएं की दीवार का निर्माण कराए जाने के निर्देश दिए। जिसके बाद मामला शांत हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी पुराने सार्वजनिक स्थल को हटाने से पूर्व उसके सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर विचार किया जाना चाहिए था। क्षेत्र में आरओ लगाने की आवश्यकता है, लेकिन इसके लिए प्राचीन कुएं को तोड़ना ही क्यों जरूरी था, यह सवाल अब चर्चा का विषय बना हुआ है। आरओ के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशकर कुएं को संरक्षित किया जा सकता था। यदि कुआं सुरक्षा की दृष्टि से अनुपयोगी था तो उसके चारों ओर सुरक्षा जाली लगाकर तथा परिसर का जीर्णोद्धार कर उसे सुरक्षित रखा जा सकता था।
क्या आरओ लगाने के लिए वर्षों पुरानी सार्वजनिक धरोहर को तोड़ना ही एकमात्र विकल्प था । कुएं को तोड़ने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और क्या स्थानीय लोगों की भावनाओं तथा इस स्थल से जुड़ी परंपराओं को ध्यान में रखा गया।












