हाथरस। दून पब्लिक स्कूल में विद्यालय प्रधानाचार्य जे. के.अग्रवाल सीबीएसई डिस्ट्रिक्ट, ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर के कुशल दिशा-निर्देशन में सीबीएसई के सीओई नोएडा की पहल पर कम्प्यूटेशनल थिंकिंग एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषय पर आधारित कार्यशाला के अगले चरण केस पेपर प्रेजेंटेशन का प्रभावशाली आयोजन किया गया।
यह कार्यशाला सीबीएसई द्वारा शिक्षकों में एआई एवं गणनात्मक सोच की समझ विकसित करने तथा इनके प्रभावी शैक्षिक प्रयोग को बढ़ावा देने की पहल के अंतर्गत आयोजित की गई।
उल्लेखनीय है कि इसी क्रम में विद्यालय में गत 23 मई को एक्सपर्ट लेड टॉक विषय पर प्रथम चरण की कार्यशाला आयोजित की गई थी। उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए केस पेपर प्रेजेंटेशन के रूप में कार्यशाला का द्वितीय चरण संपन्न हुआ।इस कार्यशाला में दून पब्लिक स्कूल, सेंट थॉमस चर्च पब्लिक स्कूल सासनी,अमोल चंद पब्लिक स्कूल सिकंद्राराऊ, ब्राइट कैरियर पब्लिक स्कूल, पावना स्कूल तथा एमएलडीवी इंटर कॉलेज के लगभग 30 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों में से छह शिक्षकों ने अपने-अपने केस पेपर प्रस्तुत किए, जिनमें कक्षा-कक्ष में एआई एवं कम्प्यूटेशनल थिंकिंग के सर्वोत्तम अभ्यासों को लागू करने से संबंधित अनुभव, नवाचार एवं साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
केस पेपर के मूल्यांकन हेतु गठित निर्णायक मंडल में प्रतिभा कमल माहौर असिस्टेंट प्रोफेसर कंप्यूटर साइंस विभाग बागला डिग्री कॉलेज, तनिषा मित्तल असिस्टेंट प्रोफेसर कंप्यूटर साइंस विभाग बागला डिग्री कॉलेज, विजय पचौरी प्रधानाचार्य आरपीएम पब्लिक स्कूल तथा हितेंद्र शर्मा, विभागाध्यक्ष कंप्यूटर साइंस विभाग सेंट फ्रांसिस इंटर कॉलेज, शामिल थे। निर्णायक मंडल द्वारा सीबीएसई के निर्धारित मानकों को ध्यान में रखते हुए 100 अंकों के आधार पर केस पेपर प्रेजेंटेशन का मूल्यांकन किया गया। मूल्यांकन के उपरांत श्रेष्ठ तीन केस पेपर, सीओई नोएडा को भेजे जाएंगे।
कार्यशाला में विशेष रूप से कक्षा तीसरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के शिक्षण-अधिगम में एआई एवं कम्प्यूटेशनल थिंकिंग के प्रभावी प्रयोग पर चर्चा की गई। साथ ही एआई के नैतिक उपयोग तथा कम्प्यूटेशनल थिंकिंग के चार प्रमुख स्तंभों से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर शिक्षकों का मार्गदर्शन किया गया। प्रतिभागियों ने इस बात पर भी विचार-विमर्श किया कि आधुनिक तकनीक का प्रयोग विद्यार्थियों में रचनात्मकता, तार्किक क्षमता, समस्या-समाधान कौशल एवं नवाचार की भावना विकसित करने के लिए किस प्रकार किया जा सकता है।।
कार्यशाला के समापन अवसर पर विद्यालय प्रधानाचार्य जे.के. अग्रवाल ने सीबीएसई की इस दूरदर्शी पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के बदलते शैक्षिक परिवेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा देने वाले महत्वपूर्ण कौशल हैं। शिक्षकों का दायित्व है कि वे इन तकनीकों का प्रयोग केवल जानकारी देने के लिए नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, रचनात्मकता, समस्या-समाधान और नवाचार की क्षमता विकसित करने के लिए करें। साथ ही एआई के नैतिक एवं जिम्मेदार उपयोग पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।उन्होंने सभी प्रतिभागी शिक्षकों को उनके सक्रिय सहभागिता एवं उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए बधाई दी तथा कहा कि ऐसी कार्यशालाएं शिक्षकों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और विद्यालयी शिक्षा में नवीन तकनीकों को प्रभावी ढंग से अपनाने का अवसर प्रदान करती हैं।।
कार्यशाला के अंत में प्रधानाचार्य जे. के.अग्रवाल ने निर्णायक मंडल के सभी अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट प्रदान किया गया, जो वार्षिक 25 घंटे की इन हाउस ट्रेनिंग में से 6 घंटे के लिए मान्य है।कार्यक्रम ने शिक्षकों को तकनीक आधारित शिक्षण की नई संभावनाओं से परिचित कराने के साथ-साथ विद्यालयों के मध्य शैक्षिक सहयोग एवं नवाचार की भावना को भी सुदृढ़ किया।









